चिंतामण गणेश मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता इसे अन्य गणेश मंदिरों से अलग पहचान देती है। मान्यता है कि यहां एक ही प्रतिमा में भगवान गणेश के तीन स्वरूप विराजमान हैं। इनमें चिंतामण गणेश को चिंता दूर करने वाला, सिद्धिविनायक को कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला और इच्छामन गणेश को मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना जाता है। इसी मान्यता के चलते गणेश चतुर्थी सहित अन्य विशेष अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। भक्त अपनी अलग-अलग मनोकामनाओं के साथ भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
मंदिर के पुजारी गणेश गुरु के अनुसार चिंतामण गणेश मंदिर का संबंध रामायण काल से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने यहां भगवान गणेश की पूजा की थी। इसी धार्मिक परंपरा के कारण भगवान गणेश को चिंतामण गणेश के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर की प्राचीन मान्यताओं और धार्मिक महत्व के कारण यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है, लेकिन गणेश चतुर्थी के दौरान विशेष आयोजन होने से भक्तों की भीड़ और बढ़ जाती है।
गणेश चतुर्थी पर मंदिर में सुबह विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान का अभिषेक और पंचामृत पूजन किया गया, जिसके बाद विशेष श्रृंगार किया गया। पूजा-अर्चना के बाद भगवान चिंतामण गणेश को 1 लाख 25 हजार लड्डुओं का भोग लगाया गया। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक भक्तों को प्रसाद वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस बार चिंतामण गणेश मंदिर में सिर्फ उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से ही श्रद्धालु नहीं पहुंचे, बल्कि दूसरे राज्यों से भी भक्त दर्शन के लिए आए। उत्तर प्रदेश के अलावा पुणे और हैदराबाद से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों के कारण मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक गतिविधियां बनी रहीं।
गणेश चतुर्थी के पर्व पर चिंतामण गणेश मंदिर में एक ओर विशेष पूजा-अर्चना और भोग का आयोजन हुआ, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के तीन स्वरूपों के दर्शन किए। धार्मिक आस्था, प्राचीन मान्यताओं और विशेष अनुष्ठानों के कारण मंदिर में आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ बने रहने की उम्मीद है। गणेशोत्सव के दौरान उज्जैन का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र बना हुआ है।