सर्वोदय अहिंसा के प्रदेश संयोजक और जिनशासन सेवक दीपक राज जैन ने बताया कि भादों सुदी पंचमी से भादों सुदी चतुर्दशी तक चलने वाले दशलक्षण महापर्व के दौरान छिंदवाड़ा सहित प्रदेश, देश और विश्व के विभिन्न स्थानों पर निवासरत दिगंबर जैन समाज के लोग धर्म के दस लक्षणों की आराधना करेंगे। जैन परंपरा में इस पर्व को आत्मशुद्धि, संयम और धर्म साधना का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इन दस दिनों में श्रद्धालु धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना पर विशेष ध्यान देंगे।
दशलक्षण महापर्व के पहले दिन 16 सितंबर को उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की जाएगी। इसके बाद 17 सितंबर को उत्तम मार्दव, 18 सितंबर को उत्तम आर्जव और 19 सितंबर को उत्तम सत्य धर्म की आराधना होगी। 20 सितंबर को उत्तम शौच धर्म तथा 21 सितंबर को संयम धर्म की आराधना की जाएगी। पर्व के सातवें दिन 22 सितंबर को उत्तम तप और 23 सितंबर को उत्तम त्याग धर्म की आराधना होगी।
महापर्व के नौवें दिन 24 सितंबर को उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना की जाएगी। इसके बाद 25 सितंबर को भादों सुदी चतुर्दशी और अनंत चौदस के शुभ अवसर पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की मंगल आराधना के साथ दशलक्षण महापर्व के दस दिनों की धार्मिक आराधना पूरी होगी। इस दौरान समाज के लोग अपनी दिनचर्या में धार्मिक अनुशासन, आत्मचिंतन और संयम को महत्व देते हुए पर्व की भावना के अनुरूप साधना करेंगे।
दशलक्षण पर्व की आराधना के बाद 26 सितंबर को भादों सुदी पूर्णिमा के अवसर पर रत्नत्रय व्रत की पूर्णता की जाएगी। इसके पश्चात 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण एकम के शुभ दिन क्षमावाणी महापर्व मनाया जाएगा। क्षमावाणी को जैन समाज में आपसी मनमुटाव दूर करने और एक-दूसरे से क्षमा मांगने तथा क्षमा करने की भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
दिगंबर जैन समाज के लिए दशलक्षण पर्यूषण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि की साधना का अवसर भी माना जाता है। दस दिनों के दौरान धर्म के विभिन्न लक्षणों की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु अपने आचरण और विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं। पर्व के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों में समाज के लोगों की सहभागिता बढ़ने की संभावना है।
छिंदवाड़ा में दशलक्षण महापर्व को लेकर सकल दिगंबर जैन समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। समाज के विभिन्न घटकों द्वारा पर्व की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आगामी 16 सितंबर से धार्मिक वातावरण के बीच महापर्व की शुरुआत होगी और 10 दिनों तक विभिन्न धर्म लक्षणों की आराधना का क्रम चलेगा। इसके बाद क्षमावाणी महापर्व के साथ धार्मिक आयोजनों का यह क्रम पूर्ण होगा।