रूस की ओर से भारत में Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट के उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने का प्रस्ताव चर्चा का प्रमुख विषय हो सकता है। यदि इस दिशा में सहमति बनती है तो भारत और रूस के रक्षा सहयोग में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। Su-57 रूस का उन्नत लड़ाकू विमान है, जिसे स्टेल्थ क्षमताओं के साथ विकसित किया गया है। इसके संभावित भारतीय उत्पादन से देश में आधुनिक सैन्य विमान निर्माण और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम समझौते की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही मानी जाएगी।
दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर भी बैठक में चर्चा संभावित है। सूत्रों के मुताबिक, भारत और रूस वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर बातचीत कर सकते हैं। इसके अलावा औद्योगिक सहयोग का विस्तार, नए निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।
रेल क्षेत्र और सुरंग निर्माण में सहयोग भी दोनों नेताओं की बातचीत का हिस्सा हो सकता है। भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ रूस की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा होने की संभावना है। इससे रोजगार और दोनों देशों के बीच मानव संसाधन सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात दिल्ली पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। भारत यात्रा के दौरान पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच रक्षा और ऊर्जा के साथ व्यापारिक संबंधों को और व्यापक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की पिछले सप्ताह बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर भी मुलाकात हुई थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को जल्द समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था और पुतिन से युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया था। ऐसे में मौजूदा बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना है।
रूसी राष्ट्रपति के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियन के बीच भी द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और संबंधों को मजबूत करने के मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। पेजेशकियन की राष्ट्रपति बनने के बाद यह पहली भारत यात्रा है। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर परिस्थितियां महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।