महासमुंद: रिखादादर पंचायत में 4.66 लाख रुपये की आर्थिक अनियमितता का आरोप, पूर्व सरपंच और सचिव के खिलाफ पुलिस में शिकायत
महासमुंद जिले के पिथौरा जनपद की ग्राम पंचायत रिखादादर में पूर्व सरपंच लोकेश प्रधान और सचिव सुभाषचन्द्र साहू पर फर्जी बिल के जरिए आर्थिक अनियमितता किए जाने का आरोप है। शिकायत की जांच में 4,66,152 रुपये की गड़बड़ी सामने आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने मामले में पुलिस अधीक्षक से आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l महासमुंद जिले के पिथौरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रिखादादर में कथित आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्राम लोहरीनडोंगरी निवासी ओमप्रकाश पटेल की शिकायत के बाद हुई जांच में ग्राम पंचायत में 4,66,152 रुपये की आर्थिक गड़बड़ी पाए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में पूर्व सरपंच लोकेश प्रधान और तत्कालीन सचिव सुभाषचन्द्र साहू के अलावा कथित तौर पर मामले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक महासमुंद के समक्ष 8 सितंबर 2026 को शिकायत प्रस्तुत की गई है।
जानकारी के अनुसार, ओमप्रकाश पटेल ने ग्राम पंचायत रिखादादर में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर 25 नवंबर 2025 को कलेक्टर महासमुंद के समक्ष शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई। जांच के लिए जनपद पंचायत पिथौरा से सुशील चौधरी और जनपद पंचायत सरायपाली से लक्ष्मीचरण पटेल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारियों ने पंचायत से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद 11 जुलाई 2026 को जनपद पंचायत पिथौरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
शिकायत में लगाए गए आरोपों के अनुसार, जांच प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत रिखादादर में आर्थिक अनियमितता पाए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूर्व सरपंच लोकेश प्रधान और सचिव सुभाषचन्द्र साहू द्वारा कथित तौर पर फर्जी बिल प्रस्तुत कर शासकीय राशि में गड़बड़ी की गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर इस मामले में कुल 4,66,152 रुपये की अनियमितता पाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस मामले में आरोपों और जांच निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित जांच और पुलिस प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिकायतकर्ता ओमप्रकाश पटेल का कहना है कि उनकी ओर से की गई शिकायत के बाद जांच में कथित वित्तीय अनियमितता सामने आई है। उन्होंने मांग की है कि मामले में केवल पूर्व सरपंच और सचिव तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने इसे शासकीय राशि से जुड़ा मामला बताते हुए शासन को कथित आर्थिक नुकसान पहुंचने का विषय बताया है।
इसी मांग को लेकर ओमप्रकाश पटेल ने 8 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक महासमुंद के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में मामले की जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पंचायत स्तर पर शासकीय राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
मामला सामने आने के बाद अब पुलिस स्तर पर शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है। वहीं पंचायत से संबंधित जांच प्रतिवेदन में सामने आई कथित आर्थिक अनियमितता को लेकर भी आगे की प्रशासनिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोप, जांच प्रतिवेदन और पुलिस शिकायत के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कही जा रही है। पूर्व सरपंच और सचिव की ओर से इस मामले में कोई पक्ष सामने आता है तो वह भी रिपोर्ट का हिस्सा बन सकता है।