मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कंवेंशन सेंटर में आयोजित समिट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में दशकों से बंद पड़ी राज्य परिवहन बस सेवा को दोबारा व्यवस्थित तरीके से शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सुगम परिवहन बस सेवा में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही बस ऑपरेटरों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के लिए 15 हजार से अधिक बसों और करीब 5 लाख किलोमीटर सड़क नेटवर्क का आधार मौजूद है। सरकार का लक्ष्य इसी नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल करते हुए यात्रियों को सुगम और सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित व्यवस्था में एक राज्य, एक बस सेवा की अवधारणा के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के बीच आवागमन को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
परिवहन विभाग के अनुसार, प्रदेश में बस सेवा के लिए डेटा आधारित रूट सर्वे किया गया है। इसमें 150 सिटी बस रूट, 450 इंटरसिटी रूट और 436 इंटरस्टेट रूट का सर्वे शामिल है। करीब 55 जिलों के रूट का सर्वे पूरा होने की जानकारी दी गई है। बस संचालन की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर यात्री परिवहन कंपनी के साथ क्षेत्रीय और जिला स्तर की व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में परिवहन सलाहकार समितियां भी गठित की गई हैं।
नई बस सेवा में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी सुविधाएं शामिल करने की योजना है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम, पैनिक बटन, जीपीएस और लाइव लोकेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को तकनीक आधारित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
समिट के दौरान मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) और रैपिडो के बीच एमओयू भी हुआ। इसके माध्यम से यात्रियों को टू-व्हीलर से बस सेवा तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनोवेशन चैलेंज की घोषणा भी की गई, जिससे परिवहन व्यवस्था में तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर रहेगा।
परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सुगम यात्री परिवहन सेवा प्रदेश के लिए ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने बताया कि बस ऑपरेशन के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है और सेवा को जमीन पर उतारने की तैयारी चल रही है। इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी योजना को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे गांवों और शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है।
समिट में इलेक्ट्रिक बस निर्माण और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी मध्य प्रदेश में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की। सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा से यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलने के साथ परिवहन क्षेत्र में निजी भागीदारी, रोजगार और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। 25 सितंबर से प्रस्तावित सेवा की शुरुआत के बाद प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बदलाव की दिशा और स्पष्ट होगी।