आ रहा है ‘बीज अधिनियम’, नकली बीज पर कसेगा शिकंजा, 60 साल पुराने कानून में होगा बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए नया बीज अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून में बीज कारोबार के लिए राष्ट्रीय रजिस्टर, हर पैकेट पर QR कोड, ट्रेसबिलिटी, गंभीर मामलों में 30 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल का प्रावधान प्रस्तावित है। किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों को सुरक्षित रखने की भी बात कही गई है।

Sep 11, 2026 - 16:14
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आ रहा है ‘बीज अधिनियम’, नकली बीज पर कसेगा शिकंजा, 60 साल पुराने कानून में होगा बड़ा बदलाव

UNITED NEWS OF ASIA. देश में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार नए बीज अधिनियम की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून मौजूदा बीज कानून की व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। सरकार का उद्देश्य किसानों को खराब गुणवत्ता वाले बीजों से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ-साथ बीज कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। प्रस्तावित कानून में उल्लंघन और गंभीर अपराधों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में दंड का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।

प्रस्तावित बीज कानून में मामूली उल्लंघन के मामलों के लिए पहले चेतावनी और इसके बाद जुर्माने का प्रावधान रखा जा सकता है। जानबूझकर किए गए उल्लंघनों में उत्पाद पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने, QR कोड नहीं लगाने या गलत ब्रांडिंग जैसे मामलों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में पहली बार अपराध पर एक लाख रुपये और दूसरी बार दो लाख रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान प्रस्तावित बताया गया है।

गंभीर अपराधों के लिए प्रस्तावित कानून में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है। नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण के बीज का कारोबार करना या जानबूझकर धोखाधड़ी जैसे मामलों को गंभीर श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे मामलों में 30 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान प्रस्तावित है। इससे नकली बीज के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

नए कानून के तहत बीज और रोपण सामग्री यानी Planting Material का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार किए जाने का प्रस्ताव है। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जा सकता है और ऐसे उत्पादों की बाजार में बिक्री की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है। QR कोड के माध्यम से किसान बीज के निर्माता, उत्पत्ति, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और सप्लाई चेन से जुड़ी जानकारी को ट्रैक कर सकेंगे।

सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में बड़ी संख्या में बीज इसके दायरे से बाहर हैं और अलग-अलग राज्यों में बीजों से संबंधित प्रक्रियाएं भी अलग हो सकती हैं। इसके अलावा मौजूदा कानून में दंड के प्रावधान पर्याप्त प्रभावी नहीं माने जा रहे हैं। इसी वजह से नकली और घटिया बीजों की बिक्री रोकने के लिए नई और मजबूत कानूनी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत बताई जा रही है।

प्रस्तावित कानून में किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों को सुरक्षित रखने की भी बात कही गई है। किसान पारंपरिक और किसान किस्म के बीजों का इस्तेमाल, आदान-प्रदान और बिक्री पहले की तरह कर सकेंगे। इन पारंपरिक बीजों के लिए अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान नहीं होने की बात कही गई है। किसान चाहें तो अपनी बीज किस्मों का स्वैच्छिक पंजीकरण करा सकेंगे। व्यक्तिगत उपयोग या गांव में वितरण के लिए बीज तैयार करने वाले किसानों के लिए भी डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य नहीं किए जाने का प्रस्ताव है।

बीजों की गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने के लिए ट्रेसबिलिटी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। यदि किसी बीज के खराब होने से किसान को नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने में ट्रेसबिलिटी मददगार हो सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था में प्रत्येक राज्य में सीड सिक्योरिटी फंड यानी बीज सुरक्षा कोष बनाने की बात कही गई है। जुर्माने और अन्य रिकवरी से प्राप्त राशि इस फंड में जमा की जा सकती है। बीज फेल होने से किसान को नुकसान होने पर सत्यापन समिति की जांच के बाद 15 दिनों के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

केंद्र सरकार के मुताबिक मौजूदा बीज अधिनियम वर्ष 1966 का है और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। प्रस्तावित नए कानून को लेकर किसानों और हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। पिछले वर्ष मसौदे पर सुझाव मांगे जाने के बाद करीब 18 हजार सुझाव मिलने की जानकारी सामने आई है। 10 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसान संगठनों के साथ बैठक कर प्रस्तावित कानून पर चर्चा की। सरकार की ओर से संसद के शीतकालीन सत्र में सीड बिल लाने की तैयारी की बात कही जा रही है। हालांकि, अंतिम प्रावधान संसद में विधेयक पेश होने और आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।