विनोद चौधरी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि ऐसी प्रतिमाओं का निर्माण इसलिए किया जा रहा है, ताकि गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण को नुकसान कम हो और आने वाले समय में भी लोग प्रकृति से लाभ उठा सकें। इस बार तैयार की जा रही प्रतिमाओं में मिट्टी और रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा प्रतिमाओं को प्राकृतिक रंगों से सजाया जा रहा है, जिससे इन्हें पर्यावरण के अनुकूल रखा जा सके।
इस वर्ष की गणेश प्रतिमाओं की खास बात इनमें इस्तेमाल की जा रही सीड बॉल है। गणेश प्रतिमा के एक हाथ में सीड बॉल रखी गई है। इसमें मीठी नीम, सहजन, जामुन और अन्य पौधों के बीज शामिल किए गए हैं। विनोद चौधरी के मुताबिक, प्रतिमा के विसर्जन के बाद सीड बॉल को नमी मिलने पर इसमें मौजूद बीज अंकुरित हो सकते हैं और आगे चलकर पौधे का रूप ले सकते हैं। इस तरह गणेश प्रतिमा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण का संदेश भी दिया जा रहा है।
विनोद चौधरी ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। पहले हर वर्ष करीब 500 प्रतिमाएं तैयार की जाती थीं, लेकिन इस वर्ष 251 प्रतिमाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन प्रतिमाओं को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल तरीके से तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पहल में केवल उनका परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास के लोग और साथी रेलवे कर्मचारी भी सहयोग कर रहे हैं।
गणेश प्रतिमाओं के निर्माण का काम लगातार जारी है और अब तक 200 से अधिक प्रतिमाएं तैयार होने की जानकारी दी गई है। प्रतिमाओं को आकार देने से लेकर उन्हें प्राकृतिक रंगों से सजाने तक की प्रक्रिया में परिवार और सहयोगी लोग मिलकर काम कर रहे हैं। इस अभियान में रेलवे कर्मचारियों की भागीदारी भी इसे सामुदायिक पहल का स्वरूप दे रही है।
इस बार BRICS थीम पर तैयार की जा रही गणेश प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक घटनाक्रम से जुड़े रचनात्मक संदेश को भी सामने ला रही हैं। विनोद चौधरी का कहना है कि 13 सितंबर तक जितनी प्रतिमाएं तैयार हो सकेंगी, उन्हें लोगों के बीच निःशुल्क वितरित किया जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य लोगों को पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
इटारसी में चल रही यह पहल गणेश उत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास है। मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमाओं के साथ सीड बॉल का प्रयोग इस अभियान को खास बनाता है। आयोजकों को उम्मीद है कि लोग इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं को अपनाकर उत्सव के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी आगे बढ़ाएंगे।