तिब्बत में बाढ़ की तबाही के बीच चीन पर वीडियो सेंसरशिप के आरोप, विदेशी पत्रकारों को रोकने का दावा

: नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद चीन पर तबाही से जुड़े वीडियो और फुटेज हटाने तथा विदेशी पत्रकारों की पहुंच सीमित करने के आरोप लगे हैं। रिपोर्टों के अनुसार चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े कुछ वीडियो हटाए गए, जबकि सरकारी मीडिया में राहत एवं बचाव अभियान पर ज्यादा जोर दिया गया। इस बीच नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की खबर सामने आई है।

Aug 30, 2026 - 14:28
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तिब्बत में बाढ़ की तबाही के बीच चीन पर वीडियो सेंसरशिप के आरोप, विदेशी पत्रकारों को रोकने का दावा

UNITED NEWS OF ASIA. नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन में आपदा से जुड़े वीडियो और फुटेज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही को दिखाने वाले कई वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए। वहीं विदेशी पत्रकारों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकने के आरोप भी सामने आए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने चीन में आपदा से जुड़ी जानकारी की उपलब्धता और सरकारी सेंसरशिप को लेकर बहस तेज कर दी है।

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ ने बड़े क्षेत्र को प्रभावित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर अब तक 676 लोगों की मौत और करीब 3,000 लोगों के लापता होने का दावा किया गया है। हालांकि चीन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़े इससे काफी अलग बताए जा रहे हैं। चीन की सरकारी जानकारी में अब तक केवल पांच लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। इसी अंतर को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें प्रभावित इलाकों में पानी और मलबे से हुई तबाही दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए कुछ वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर साझा किए गए थे, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार बाद में इनमें से कुछ सामग्री को हटा दिया गया। इससे चीन में आपदा की वास्तविक स्थिति को लेकर स्वतंत्र जानकारी हासिल करने में मुश्किल होने का दावा किया जा रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में एक बॉर्डर क्रॉसिंग के पास मलबे का सैलाब आने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस फुटेज में बाढ़ और मलबे की तेज रफ्तार दिखाई देने की बात कही गई। बताया गया कि यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया से बाद में हटा दिया गया। दूसरी ओर ग्यिरोंग पोर्ट के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया के जरिए चीन के बाहर तेजी से फैल गए।

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों में भी चीन की सूचना व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन के सरकारी मीडिया ने कथित तौर पर बाढ़ के वीडियो की जगह उसकी एक तस्वीर का इस्तेमाल किया। इससे यह चर्चा शुरू हुई कि चीन में सरकारी मीडिया आपदा की खबरों को किस तरह प्रस्तुत कर रहा है।

चीन की सरकारी मीडिया में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव अभियान पर अधिक जोर दिया जा रहा है। बताया गया है कि प्रभावित इलाकों में चीनी सेना के जवानों और अन्य राहतकर्मियों को भेजा गया है। बचाव दल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री उपलब्ध कराने के काम में जुटे हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक अखबार पीपुल्स डेली के अनुसार राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्यिरोंग में बाढ़ प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करने का निर्देश दिया है। सरकारी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। हालांकि सोशल मीडिया से वीडियो हटाए जाने और पत्रकारों की पहुंच सीमित किए जाने के आरोपों के कारण चीन की आपदा संबंधी सूचना व्यवस्था पर सवाल बने हुए हैं।

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरें घटनास्थल की वास्तविक स्थिति समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि आपदा से संबंधित सामग्री उपलब्ध नहीं रहती है तो प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का स्वतंत्र आकलन करना मुश्किल हो सकता है। नेपाल और तिब्बत में आई इस बाढ़ के बाद भी सोशल मीडिया पर सामने आई सामग्री ने दुनिया का ध्यान प्रभावित इलाकों की ओर खींचा है।

फिलहाल चीन में बाढ़ से जुड़े वीडियो को हटाने और विदेशी पत्रकारों को प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोकने के आरोपों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। दूसरी ओर चीन की सरकारी मशीनरी राहत और बचाव कार्यों पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में प्रभावित क्षेत्रों से अधिक जानकारी सामने आने के साथ बाढ़ से हुए वास्तविक नुकसान और राहत अभियान की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।