योग कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया और योग गतिविधियों में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भारत और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक एवं सामाजिक साझेदारी की झलक भी देखने को मिली। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय के लोगों में भी उत्साह नजर आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। आज प्रधानमंत्री उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, आपसी सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं बहुआयामी संबंध हैं। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की यात्रा भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। भारत मध्य एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत करने पर जोर दे रहा है। उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने से क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार, संस्कृति और अन्य साझा हितों से जुड़े क्षेत्रों में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
योग भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। भारत के सहयोग से उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का पहला देश बना है, जहां आयुष मंत्रालय के योग प्रमाणन बोर्ड के तहत योग प्रमाणन परीक्षाएं आयोजित की गई हैं। इससे दोनों देशों के बीच योग और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का संकेत मिलता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान ताशकंद में भारतीय और उज्बेक संस्कृति की शानदार झलक भी देखने को मिली। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में उज्बेकिस्तान के बच्चों ने हिंदी गीत पर नृत्य प्रस्तुति दी, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने देखा और कार्यक्रम का आनंद लिया। इस प्रस्तुति ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की आत्मीयता को दर्शाया।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव की प्रस्तावित वार्ता पर दोनों देशों की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी चर्चा हो सकती है। उज्बेकिस्तान की यह यात्रा भारत की मध्य एशिया के साथ सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।