सातधार में 15 साल पुराना PMGSY पुल बारिश में बहा, कई गांवों का संपर्क टूटने का खतरा
गरियाबंद जिले में नवागढ़-सातधार मार्ग पर करीब 15 साल पुराना PMGSY पुल बारिश के तेज बहाव में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पुल का एक बड़ा हिस्सा बह जाने से सातधार, भैसातरा, गर्भनतारा और कोकड़ी समेत कई गांवों के लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। विभाग ने पुल के पुनर्निर्माण के लिए करीब 2 करोड़ रुपये का अनुमानित स्टेज-1 एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा है।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l लगातार हो रही बारिश के बीच नवागढ़ और सातधार के बीच बना करीब 15 साल पुराना प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY का पुल तेज बारिश और पानी के बहाव की वजह से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल का एक बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया, जिसके बाद इस मार्ग से आवागमन को लेकर आसपास के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों के लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
नवागढ़-सातधार के बीच स्थित यह पुल सातधार, भैसातरा, गर्भनतारा और कोकड़ी सहित कई गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग का हिस्सा है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण इन गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है और रोजाना बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, किसान, मजदूर और मरीज इसी रास्ते से आवागमन करते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में हर साल पुल पर पानी का दबाव बढ़ता है। इसके बावजूद समय रहते पुल की मरम्मत और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इस बार लगातार बारिश के बाद पानी का बहाव तेज होने से पुल का एक हिस्सा ही बह गया। पुल के आसपास और नीचे मिट्टी का कटाव भी हुआ है, जिससे बचे हुए हिस्से की सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना हुआ है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने से सबसे अधिक चिंता आपातकालीन परिस्थितियों को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी गर्भवती महिला, गंभीर मरीज या अन्य जरूरतमंद व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता पड़ी तो रास्ता बाधित होने के कारण बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मौके का निरीक्षण कर आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने पुल की स्थिति को लेकर विभागीय स्तर पर समय रहते तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुल कई गांवों के लिए जीवनरेखा के समान है। ऐसे में इसके क्षतिग्रस्त होने के बाद लंबे समय तक मार्ग बंद रहने से ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
मामले में PMGSY के संबंधित अधिकारी अभिषेक पाठकर ने बताया कि नवागढ़-सातधार के बीच क्षतिग्रस्त पुल करीब 50 मीटर स्पैन का है। पुल के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का स्टेज-1 एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित विभाग पुल की स्थिति का तत्काल निरीक्षण करें तथा जब तक स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बारिश के दौरान पुल के आसपास पानी और मिट्टी के कटाव को देखते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सातधार क्षेत्र में पुल क्षतिग्रस्त होने की घटना ने ग्रामीण सड़कों और पुलों की बारिश से पहले नियमित जांच एवं रखरखाव की जरूरत को भी सामने ला दिया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाकर जल्द ही इस महत्वपूर्ण मार्ग को सुरक्षित और सुचारू किया जाएगा।