बाढ़ के कारण करीब 400 दुकानें पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है। कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भर जाने से नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने की स्थिति बनी हुई है। यूपी और मध्य प्रदेश के बीच सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से रेल आवागमन पर भी असर पड़ा है। कई लोग घरों और होटलों में फंसे होने की सूचना के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।
मंदाकिनी नदी का बढ़ा जलस्तर
चित्रकूट के घाटों पर भी बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है। मंदाकिनी का पानी घाटों और सीढ़ियों तक पहुंच गया है। तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के बरगी डैम से पानी छोड़े जाने और लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर और बढ़ गया।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए झांसी-प्रयागराज हाईवे पर भी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। दो हेलीकॉप्टर और SDRF की टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई हैं। अब तक करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी गई है। जिला मजिस्ट्रेट पुलकित गर्ग ने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि प्रभावित लोगों तक खाने-पीने की सामग्री और पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित इलाकों में अनावश्यक रूप से न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
प्रयागराज में भी गंगा-यमुना उफान पर
चित्रकूट के साथ प्रयागराज में भी गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार तड़के गंगा का पानी लेटे हनुमान मंदिर परिसर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। पानी गर्भगृह तक पहुंचने के बाद मंदिर परिसर में विशेष आरती की गई।
27 जिलों में बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सोनभद्र में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि लखनऊ सहित आसपास के कई जिलों में बादल छाए हुए हैं। शनिवार को लखनऊ, वाराणसी और कानपुर समेत करीब 20 शहरों में बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सिस्टम के आगे बढ़ने से 31 अगस्त तक बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है। हालांकि सितंबर के पहले सप्ताह में नए मौसम तंत्र के प्रभाव से एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है और राहत-बचाव कार्य लगातार जारी है।