न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत का संदेश, कहा- भारत में मुसलमान न हों, ऐसी सोच हिंदुत्व नहीं

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी’ धर्मगुरु सम्मेलन को संबोधित करते हुए धर्म, मानवता और सामाजिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, ऐसा सोचने वाला व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता। भागवत ने कहा कि पूजा-पद्धतियां और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता एक है। उन्होंने ‘मैं और मेरा’ की राजनीति के बजाय ‘हम और हमारा’ की भावना को समाधान बताया।

Aug 30, 2026 - 08:59
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न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत का संदेश, कहा- भारत में मुसलमान न हों, ऐसी सोच हिंदुत्व नहीं

UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी’ धर्मगुरुओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए धर्म, मानवता और सामाजिक एकता को लेकर अपना संदेश दिया। अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरुओं की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताएं और पूजा-पद्धतियां भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता का मूल भाव एक है।

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की परंपरा में लंबे समय से यह विचार मौजूद रहा है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उनके इस बयान को धार्मिक सद्भाव और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

भागवत ने कहा कि दुनिया में अलग-अलग धर्मों की पहचान अक्सर उनकी पूजा-पद्धतियों, रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुशासन से होती है। हालांकि, इन भिन्नताओं के बावजूद मानव गरिमा और इंसानियत का मूल भाव समान है। उन्होंने सभी धर्मों के रास्तों के बीच समानता और आपसी सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने अपने संबोधन में भारत की सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां अलग-अलग धार्मिक रास्तों के बावजूद मानवता को एक माना गया है। उनके अनुसार, स्वयं को हिंदू कहने का अर्थ केवल किसी विशेष पूजा-पद्धति को मानना नहीं, बल्कि सभी मनुष्यों के प्रति समान भाव रखना भी है।

RSS प्रमुख ने दुनिया में जारी संघर्ष और राजनीति के बदलते स्वरूप पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज और देश ने लंबे समय में विदेशी हमलों समेत कई परिस्थितियों का सामना किया है और इस दौरान बहुत कुछ खोया गया। उन्होंने राजनीति में बढ़ती स्वार्थ की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि जहां केवल ‘मैं और मेरा’ का भाव होता है, वहां समाधान की संभावना कम हो जाती है।

मोहन भागवत ने ‘हम और हमारा’ की भावना को समाधान बताते हुए सामूहिक सोच और सामाजिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, जहां अलग-अलग पहचान और मान्यताओं के बावजूद लोगों के बीच मानवता का भाव मजबूत रहे।

न्यूयॉर्क में आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों की मौजूदगी के बीच भागवत का संबोधन धर्मों के बीच संवाद और मानवता को केंद्र में रखने पर आधारित रहा। उन्होंने सभी समुदायों के बीच सहयोग, सम्मान और एकता की आवश्यकता पर बल दिया।

भागवत ने कहा कि वह ऐसे समाज के लिए काम कर रहे हैं, जिसकी परंपरा यह मानती है कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। उनका संदेश धार्मिक विविधता के बीच सामाजिक एकता और आपसी सम्मान को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।