राहुल गांधी का आरोप- खड़गे के भाषण स्थल का हुआ ‘शुद्धिकरण’, बोले- यह छुआछूत का दूसरा नाम
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ किया गया। उन्होंने इसे छुआछूत की मानसिकता बताते हुए कार्रवाई की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए सामाजिक भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड दौरे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे के भाषण के बाद वहां ‘शुद्धिकरण’ किया गया। राहुल गांधी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
राहुल गांधी ने कहा कि किसी दलित नेता के किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने या वहां कार्यक्रम करने के बाद उस स्थान का ‘शुद्धिकरण’ करना उस मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को अशुद्ध या अछूत माना जाता है। उन्होंने इसे छुआछूत से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय संविधान में छुआछूत को गैरकानूनी घोषित किया गया है। ऐसे में इस तरह की किसी भी घटना पर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ राजनीतिक नेता के साथ इस तरह की घटना का आरोप सामने आ सकता है, तो देश के सामान्य दलित नागरिकों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक सम्मान और समानता संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकारों का हिस्सा हैं और इन अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में दलितों के खिलाफ कथित भेदभाव की कई घटनाओं का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी ने दावा किया कि सामाजिक भेदभाव केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में भी ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने पानी के स्रोतों के इस्तेमाल में रोक, चाय की दुकानों पर अलग-अलग कप दिए जाने और स्कूलों में दलित बच्चों के साथ कथित भेदभाव जैसी घटनाओं का जिक्र किया।
राहुल गांधी ने राजस्थान का उदाहरण देते हुए भी एक कथित घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल के नेता के मंदिर जाने के बाद मंदिर के ‘शुद्धिकरण’ की बात सामने आई थी। उन्होंने इन घटनाओं को संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में कानून और संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करते हैं। इसके बावजूद यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके साथ भेदभाव किया जाता है या उसके सार्वजनिक स्थान पर जाने के बाद ‘शुद्धिकरण’ जैसी कार्रवाई की जाती है, तो यह गंभीर सामाजिक मुद्दा है।
उन्होंने केंद्र सरकार और प्रशासन से ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की। राहुल गांधी का कहना है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से सामाजिक भेदभाव समाप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसी घटनाओं पर कानून के अनुसार कार्रवाई भी जरूरी है।
इस पूरे मामले को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने इसे सामाजिक समानता और दलित सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों और प्रशासन के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि संविधान में समानता और सम्मान का अधिकार सभी नागरिकों के लिए है। उनका जोर इस बात पर रहा कि जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी मानसिकता के खिलाफ सामाजिक और कानूनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।