पिथौरा की पिलवापाली नदी पर रेत खनन के आरोप, ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की

महासमुंद के पिथौरा क्षेत्र की पिलवापाली नदी में बड़े पैमाने पर रेत खनन का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का दावा है कि रोजाना बड़ी संख्या में ट्रैक्टर नदी से रेत निकाल रहे हैं, जिससे सड़क और पर्यावरण प्रभावित हो रहे हैं।

Aug 29, 2026 - 14:38
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पिथौरा की पिलवापाली नदी पर रेत खनन के आरोप, ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र की पिलवापाली नदी में कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी क्षेत्र में लंबे समय से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। उनका दावा है कि रोजाना 100 से अधिक ट्रैक्टर नदी क्षेत्र में पहुंचते हैं और सुबह से देर रात तक रेत परिवहन का सिलसिला चलता रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और खनिज विभाग से मामले की जांच कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिलवापाली नदी क्षेत्र में तड़के से ही रेत से भरे वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के कुछ हिस्सों में स्वीकृत क्षेत्र से बाहर भी रेत निकाले जाने की आशंका है। इसके अलावा भारी मशीनों के इस्तेमाल और नदी के भीतर गहराई तक खुदाई किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कई स्थानों पर 10 से 15 फीट तक गहरे गड्ढे दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि किन क्षेत्रों में रेत खनन की अनुमति है और मौके पर हो रही गतिविधियां स्वीकृत नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।

सड़कें भी प्रभावित होने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि रेत से ओवरलोड ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही के कारण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें जर्जर होने और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होने की शिकायत सामने आई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से अवैध खनन करने वालों के हौसले बढ़े हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नदी क्षेत्र में निगरानी और कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

प्रशासन की निगरानी पर सवाल

रेत खनन पर नियंत्रण के लिए प्रशासन और खनिज विभाग द्वारा समय-समय पर निगरानी की व्यवस्था किए जाने की बात कही जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि दिन के समय जांच या निगरानी होने के बाद भी रात में रेत उत्खनन दोबारा शुरू हो जाता है।

ग्रामीणों ने नदी क्षेत्र में नियमित निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल दिन में निरीक्षण करने के बजाय सुबह और देर रात तक वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांच की जानी चाहिए कि नदी से रेत निकालने वाले वाहनों के पास वैध दस्तावेज और अनुमति है या नहीं।

पिलवापाली के अलावा ग्रामीणों ने लीलेसर घाट क्षेत्र में भी रेत खनन से पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नदी के अलग-अलग हिस्सों में लगातार खनन होने से प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है।

नदी और पर्यावरण पर संभावित असर

नदी से अत्यधिक मात्रा में रेत निकाले जाने को लेकर पर्यावरणविदों की ओर से भी समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है। नदी तल से लगातार रेत हटने पर नदी की प्राकृतिक संरचना और पानी के प्रवाह में बदलाव की संभावना रहती है। इससे नदी के किनारों पर कटाव बढ़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में नदी का प्राकृतिक मार्ग भी प्रभावित हो सकता है।

रेत नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। नदी तल और रेत वाले क्षेत्रों में कई प्रकार के सूक्ष्मजीव तथा जलीय जीव अपना आवास बनाते हैं। बड़े पैमाने पर खनन होने पर इन जीवों के आवास प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसका असर स्थानीय जैव विविधता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

भूजल को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। नदी और उसके आसपास मौजूद रेत पानी के प्राकृतिक संचयन में भूमिका निभाती है। यदि नदी तल से अत्यधिक रेत निकाल दी जाए तो पानी के ठहराव और प्राकृतिक पुनर्भरण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। लंबे समय में इसका असर आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्तर पर पड़ सकता है।

बाढ़ और जल गुणवत्ता को लेकर भी चिंता

नदी की प्राकृतिक संरचना में बड़े स्तर पर बदलाव होने से बारिश के दौरान पानी के प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। नदी तल की अत्यधिक खुदाई से कहीं-कहीं पानी का बहाव तेज हो सकता है और तट कटाव की समस्या बढ़ सकती है। इससे नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।

इसके अलावा भारी मशीनों की आवाजाही और नदी में होने वाली गतिविधियों से पानी में मिट्टी तथा अन्य कणों की मात्रा बढ़ सकती है। इससे पानी का मैलापन बढ़ने और जलीय जीवों के प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर महासमुंद और एसडीएम पिथौरा से पिलवापाली नदी क्षेत्र में रेत खनन की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि नदी के स्वीकृत खनन क्षेत्रों, खसरा नंबर, खनन की मात्रा और परिवहन किए जा रहे रेत से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने नदी क्षेत्र में मशीनों के इस्तेमाल, गहरे गड्ढों और भारी वाहनों की आवाजाही की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। वहीं प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नदी क्षेत्र में कितना खनन वैध है और किन गतिविधियों में नियमों का उल्लंघन हुआ है।

पिलवापाली नदी को लेकर उठी शिकायत ने एक बार फिर नदी संरक्षण, खनिज संसाधनों के नियंत्रित उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन की जरूरत को सामने ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई पर है। यदि शिकायतों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाती है तो नदी क्षेत्र में वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है और नियम विरुद्ध गतिविधियां पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।