सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंचीं दिल्ली हाईकोर्ट, अस्पताल से शिफ्ट करने की मांग

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने अस्पताल में अवैध हिरासत और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।

Jul 19, 2026 - 14:22
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सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंचीं दिल्ली हाईकोर्ट, अस्पताल से शिफ्ट करने की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वांगचुक को तत्काल अस्पताल से रिहा करने या परिवार की पसंद के किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वांगचुक को परिवार, वकीलों और निजी डॉक्टरों से दूर रखकर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है।

सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनका अनशन जारी है। इसी बीच उनकी पत्नी ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि उन्हें सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है और बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

गीतांजलि आंग्मो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ने परिवार को बताया था कि वांगचुक का पोटैशियम स्तर 2.9 तक गिर गया है, जिसे गंभीर और जानलेवा स्थिति बताया गया। हालांकि अस्पताल की सार्वजनिक हेल्थ बुलेटिन में केवल पोटैशियम स्तर घटने का उल्लेख किया गया और वास्तविक आंकड़ा साझा नहीं किया गया। उनका कहना है कि बाद में स्वतंत्र लैब की जांच में पोटैशियम स्तर 3.5 पाया गया, जो सामान्य सीमा के भीतर है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक को डिस्चार्ज करने या निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी। गीतांजलि का कहना है कि अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण परिवार के लोगों का आना-जाना भी कठिन हो गया है। उन्होंने इसे चिकित्सा देखभाल नहीं बल्कि गैर-कानूनी हिरासत बताया है।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वांगचुक की मौजूदा स्थिति को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन घोषित किया जाए। साथ ही उन्हें तत्काल रिहा करने या परिवार की पसंद के अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश जारी किया जाए।

इस पूरे मामले में पोटैशियम स्तर को लेकर अस्पताल और परिवार के दावों में भी अंतर सामने आया है। गीतांजलि आंग्मो का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वांगचुक की तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।

अब इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है, जहां अदालत वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति, हिरासत और अस्पताल में उपचार से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करेगी। यह मामला स्वास्थ्य अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े कर रहा है।