अबूझमाड़ के कच्चापाल वाटरफॉल में मधुमक्खियों का हमला, पर्यटकों में मची अफरा-तफरी

नारायणपुर के अबूझमाड़ स्थित कच्चापाल वाटरफॉल में आग और धुएं से भड़की मधुमक्खियों ने पर्यटकों पर हमला कर दिया। कई लोग घायल हुए। घटना के बाद पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

Jul 19, 2026 - 18:06
Jul 19, 2026 - 18:07
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अबूझमाड़ के कच्चापाल वाटरफॉल में मधुमक्खियों का हमला, पर्यटकों में मची अफरा-तफरी

UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कम होने के बाद यहां के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, प्राकृतिक झरने और मनमोहक वादियां अब बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इन्हीं प्रमुख स्थलों में शामिल कच्चापाल वाटरफॉल रविवार को उस समय अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब मधुमक्खियों के अचानक हुए हमले से वहां मौजूद पर्यटकों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना में कई पर्यटकों को मधुमक्खियों ने डंक मार दिया, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छुट्टी होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक कच्चापाल वाटरफॉल घूमने पहुंचे थे। कुछ लोग झरने के नीचे भोजन तैयार करने के लिए लकड़ियां जलाकर खाना बना रहे थे। आग से उठे धुएं के कारण पास में मौजूद मधुमक्खियों का छत्ता प्रभावित हुआ और देखते ही देखते बड़ी संख्या में मधुमक्खियां बाहर निकल आईं। कुछ ही पलों में उन्होंने आसपास मौजूद लोगों पर हमला कर दिया।

अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोग पानी की ओर दौड़े तो कुछ जंगल की तरफ निकल गए। इस दौरान कई पर्यटकों को चेहरे, हाथ, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर मधुमक्खियों ने डंक मार दिए, जिससे उन्हें तेज दर्द और सूजन की शिकायत हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने एक-दूसरे की मदद करते हुए घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

घटना के बाद पर्यटकों ने बताया कि कच्चापाल वाटरफॉल प्राकृतिक रूप से बेहद सुंदर स्थल है, लेकिन यहां सुरक्षा व्यवस्था लगभग नदारद है। उनका कहना था कि घटनास्थल पर कोई सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं था और न ही किसी प्रकार की आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध थी। यदि किसी पर्यटक की स्थिति गंभीर हो जाती तो तत्काल राहत मिलना मुश्किल हो सकता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अबूझमाड़ क्षेत्र में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और हर सप्ताह बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि कच्चापाल वाटरफॉल जैसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए, जिनमें आग जलाने, धूम्रपान करने और वन्य जीवों या मधुमक्खियों के छत्तों के आसपास सावधानी बरतने संबंधी स्पष्ट निर्देश दिए जाएं।

स्थानीय नागरिकों ने यह भी मांग की कि पर्यटन स्थलों पर प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, प्राथमिक उपचार केंद्र, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, एम्बुलेंस सुविधा तथा रेस्क्यू टीम की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि बढ़ते पर्यटन के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल क्षेत्रों में मधुमक्खियों के छत्ते सामान्य रूप से पाए जाते हैं। आग, धुआं या तेज आवाज जैसी गतिविधियां उन्हें आक्रामक बना सकती हैं। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे वन्यजीवों या मधुमक्खियों को खतरा महसूस हो।

घटना के बाद स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कच्चापाल वाटरफॉल सहित जिले के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। साथ ही वहां आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

पर्यटन से स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिल रहा है, लेकिन यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो ऐसी घटनाएं पर्यटकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन पर्यटन विकास के साथ-साथ सुरक्षा प्रबंधन पर भी समान रूप से ध्यान दे।

फिलहाल घटना के बाद स्थिति सामान्य है, लेकिन मधुमक्खियों के हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्यटकों ने प्रशासन से जल्द आवश्यक कदम उठाने और कच्चापाल वाटरफॉल सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।