कबीरधाम में महिलाओं ने संभाली स्टीयरिंग: ‘दीदियों की गाड़ी’ से बदलेगा ग्रामीण परिवहन

कबीरधाम जिले में महिला स्व सहायता समूहों को 10 टाटा मैजिक वाहन सौंपे गए, जिससे महिलाएं अब परिवहन व्यवसाय में कदम रख रही हैं। यह पहल न केवल उनकी आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत करेगी।

Mar 24, 2026 - 16:27
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कबीरधाम में महिलाओं ने संभाली स्टीयरिंग: ‘दीदियों की गाड़ी’ से बदलेगा ग्रामीण परिवहन

UNITED NEWS OF ASIA.कवर्धा | कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली है, जहां अब तक पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन व्यवसाय में महिलाओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। स्व सहायता समूहों से जुड़ी “दीदियां” अब स्टीयरिंग संभालते हुए न केवल अपनी आजीविका को सशक्त बना रही हैं, बल्कि ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं।

सरस मेले के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 10 महिला स्व सहायता समूहों को आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहनों की चाबियां सौंपी। इस पहल को जिले में रोजगार सृजन और महिला आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री विजय  शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि प्रत्येक वाहन की लागत लगभग 7.50 लाख रुपये है, जिसमें से 5 लाख रुपये केंद्र सरकार द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए गए हैं। शेष राशि महिला समूहों द्वारा वहन की गई है, जिससे उनमें जिम्मेदारी और स्वावलंबन की भावना विकसित होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बनेगी और वे अपने क्षेत्रों में यात्री परिवहन सेवाएं संचालित कर सकेंगी।

उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि यह योजना दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, जहां परिवहन सुविधाएं अब तक सीमित रही हैं। अब इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सुलभ यातायात सुविधा मिल सकेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

जिला पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाहन संचालन से पहले महिला समूह की सदस्यों को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह वाहन जिले के 10 अलग-अलग संकुलों के महिला समूहों को सौंपे गए हैं, जिन्हें विभिन्न ग्रामीण रूटों पर संचालित किया जाएगा।

इस पहल के तहत महिलाएं अब परिवहन व्यवसाय से सीधे जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी। यह कदम न केवल उनकी आय में वृद्धि करेगा, बल्कि समाज में उनकी भूमिका को भी सशक्त बनाएगा। महिलाओं को प्रेरित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अगर महिलाएं इस अवसर का सही उपयोग करेंगी, तो वे “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकती हैं।

कबीरधाम जिले की यह पहल महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है, जहां महिलाएं परंपरागत सीमाओं को तोड़कर नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जिससे ग्रामीण भारत में महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।