कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में उपमुख्यमंत्री ने मेले में लगे विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की। उन्होंने समूह की महिलाओं से उनके व्यवसाय, उत्पादन प्रक्रिया और विपणन की जानकारी भी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं आज अपने परिवार की मजबूत आधार स्तंभ बन चुकी हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम योगदान दे रही हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरस मेला दुर्ग संभाग के सात जिलों की महिला स्व सहायता समूहों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां उन्हें अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिल रहा है। जैविक खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, मिलेट उत्पाद, हस्तशिल्प, हैंडलूम बैग, अगरबत्ती, पापड़ और अन्य स्थानीय उत्पाद मेले का प्रमुख आकर्षण हैं।
उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 2.69 लाख से अधिक महिला स्व सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें “लखपति दीदी” योजना प्रमुख है। अब तक राज्य में 8 लाख से अधिक लखपति दीदी तैयार की जा चुकी हैं। इसके अलावा महिलाओं को बैंक लिंकेज के माध्यम से उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन को बढ़ाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म एप विकसित किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ता सीधे इन उत्पादों को खरीद सकेंगे। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत महिलाएं अब डीलर दीदी के रूप में निर्माण सामग्री आपूर्ति में भी भागीदारी निभा रही हैं।
मेले के दौरान 10 टाटा मैजिक वाहन भी महिला समूहों को प्रदान किए गए, जिससे उनके व्यवसाय को गति मिलेगी। इसके अलावा बैंक लिंकेज के तहत 10 करोड़ रुपये, 271 समूहों को 40.65 लाख रुपये की चक्रीय निधि और 172 समूहों को 1.03 करोड़ रुपये की सामुदायिक निवेश निधि प्रदान की गई।
यह सरस मेला 23 से 26 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और किड्स जोन भी आकर्षण का केंद्र हैं। यह आयोजन महिला उद्यमिता को नई पहचान देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।