घर में सीलन और नमी को न करें नजरअंदाज, मानसून में बढ़ सकती हैं ये 5 स्वास्थ्य समस्याएं

मानसून के दौरान घर में बढ़ती सीलन और नमी फफूंद के पनपने का कारण बन सकती है, जिससे एलर्जी, अस्थमा, सांस संबंधी परेशानी, लगातार खांसी और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखने, लीकेज ठीक करने और नमी को नियंत्रित करने से इन परेशानियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

Sep 4, 2026 - 13:08
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घर में सीलन और नमी को न करें नजरअंदाज, मानसून में बढ़ सकती हैं ये 5 स्वास्थ्य समस्याएं

UNITED NEWS OF ASIA. मानसून का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन बारिश के साथ घरों में बढ़ने वाली नमी और सीलन स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। दीवारों पर काले या हरे धब्बे, पेंट का उखड़ना, लगातार बदबू और लंबे समय तक गीली रहने वाली जगहें घर में फफूंद यानी मोल्ड के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। फफूंद के कण हवा में फैलकर कुछ लोगों में एलर्जी और सांस संबंधी लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इसलिए मानसून के दौरान घर की सफाई के साथ-साथ सीलन और नमी पर भी ध्यान देना जरूरी है।

सीलन और फफूंद से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में एलर्जी और एलर्जिक राइनाइटिस शामिल हैं। फफूंद के छोटे कण हवा में मौजूद होकर सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। इनके संपर्क में आने पर छींक, नाक बंद होना या बहना, आंखों में खुजली और पानी आने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से मोल्ड या अन्य एलर्जी की समस्या रहती है, उनमें इसके लक्षण अधिक परेशान करने वाले हो सकते हैं।

घर में मौजूद नमी और फफूंद अस्थमा से जूझ रहे लोगों के लिए भी परेशानी बढ़ा सकती है। फफूंद और अन्य एलर्जेन के संपर्क में आने से खांसी, घरघराहट और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ संवेदनशील लोगों में फफूंद का संपर्क अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है। ऐसे में अस्थमा से पीड़ित लोगों को घर के नम हिस्सों की नियमित सफाई और नमी को नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

लगातार नम वातावरण में रहने का संबंध कुछ श्वसन संबंधी लक्षणों और संक्रमणों से भी देखा गया है। विशेष रूप से बच्चों और पहले से सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों को नम या फफूंद वाले वातावरण से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। घर में हवा का उचित आवागमन बनाए रखना और लंबे समय तक गीली रहने वाली जगहों को जल्द सुखाना उपयोगी हो सकता है।

सीलन और फफूंद से निकलने वाले कुछ एलर्जेन तथा जलन पैदा करने वाले कण नाक, गले और श्वसन तंत्र में परेशानी पैदा कर सकते हैं। इससे लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में लंबे समय तक नम वातावरण में रहने से ब्रोंकाइटिस जैसे श्वसन संबंधी लक्षण भी परेशान कर सकते हैं। हालांकि लगातार या गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

सीलन का असर केवल सांस और एलर्जी तक सीमित नहीं रहता। कुछ संवेदनशील लोगों में फफूंद के संपर्क से त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते या जलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए घर के नम हिस्सों की अनदेखी करना सही नहीं है।

मानसून में घर को सीलन से बचाने के लिए सबसे पहले दीवारों, छत, खिड़कियों और पाइपलाइन से होने वाले लीकेज की जांच करनी चाहिए। घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और गीली चीजों को जल्द सुखाएं। घर के अंदर नमी को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर डीह्यूमिडिफायर या एयर कंडीशनर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर दीवार या फर्नीचर पर फफूंद दिखाई दे रही है या लगातार सीलन की बदबू बनी हुई है, तो केवल उसे ढकने के बजाय नमी के मूल स्रोत को दूर करना जरूरी है। बड़ी मात्रा में फफूंद दिखाई देने या सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है। समय रहते सीलन को नियंत्रित करने से मानसून के दौरान होने वाली कई स्वास्थ्य परेशानियों का जोखिम कम किया जा सकता है।