ISRO में ब्रेन ड्रेन रोकने के लिए सरकार सख्त, वैज्ञानिकों के इस्तीफे और VRS पर नई व्यवस्था
अंतरिक्ष विभाग ने ISRO और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से संबंधित नई व्यवस्था लागू की है। अब ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय अंतरिक्ष विभाग स्तर पर लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और प्रतिभा पलायन पर नियंत्रण रखना है।
UNITED NEWS OF ASIA. भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) को लेकर नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। 14 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, अब ऐसे मामलों में संबंधित केंद्र स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा, बल्कि प्रत्येक आवेदन को अंतरिक्ष विभाग के समक्ष भेजा जाएगा, जहां उसकी समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और अनुभवी वैज्ञानिकों की मांग लगातार बढ़ रही है। बेहतर वेतन, आधुनिक अनुसंधान सुविधाएं और नए अवसरों के कारण कई विशेषज्ञ निजी स्पेस कंपनियों का रुख कर रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मानव संसाधन को संरक्षित रखने की दिशा में सक्रिय हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के समय में गगनयान, चंद्रयान-3 और अन्य प्रमुख परियोजनाओं से जुड़े कई वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने ISRO छोड़ दिया है। इन घटनाओं ने अंतरिक्ष विभाग की चिंता बढ़ाई है, क्योंकि ऐसे अनुभवी विशेषज्ञों का जाना भविष्य की रणनीतिक परियोजनाओं पर असर डाल सकता है।
नई व्यवस्था के तहत ISRO के सभी केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक या इंजीनियर का इस्तीफा या VRS का आवेदन प्राप्त होता है तो उसे स्थानीय स्तर पर मंजूरी न दी जाए। ऐसे सभी मामलों को अंतरिक्ष विभाग को भेजा जाएगा, जहां परियोजना की आवश्यकता, संबंधित अधिकारी की भूमिका और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। सरकार की नई अंतरिक्ष नीति के बाद कई निजी कंपनियां उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्रिय हुई हैं। इससे अनुभवी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मांग भी काफी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र में आकर्षक वेतन और बेहतर करियर अवसर प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशन और भविष्य की अन्य रणनीतिक परियोजनाओं की सफलता के लिए अनुभवी वैज्ञानिकों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से नई प्रक्रिया लागू की गई है, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना पर कार्यरत विशेषज्ञ के सेवा छोड़ने से पहले उसके प्रभाव का समुचित मूल्यांकन किया जा सके।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य वैज्ञानिकों के अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाओं की निरंतरता और देश की वैज्ञानिक क्षमता को मजबूत बनाए रखना है। भविष्य में भी आवश्यकता के अनुसार इस संबंध में नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं।