बिना अनुमति पेड़ कटाई का आरोप, चांदामेटा में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

परासिया के चांदामेटा क्षेत्र में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डब्ल्यूसीएल कर्मचारियों की मौजूदगी में पेड़ों की कटाई की गई, जबकि वन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामले को लेकर जांच और कार्रवाई की मांग उठाई गई है।

Jul 16, 2026 - 13:37
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बिना अनुमति पेड़ कटाई का आरोप, चांदामेटा में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाडा l मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र अंतर्गत चांदामेटा में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वार्ड क्रमांक-7 स्थित डब्ल्यूसीएल के आवासीय परिसर में नीलगिरी के पेड़ों को छंटाई के नाम पर काटा जा रहा है। इस मामले में वन विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकार एक ओर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, चांदामेटा थाना के सामने स्थित डब्ल्यूसीएल के एक बंगले परिसर में लगे नीलगिरी के पेड़ों की कटाई मजदूरों के माध्यम से कराई जा रही थी। आरोप है कि इस दौरान डब्ल्यूसीएल के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पेड़ों की कटाई के संबंध में अनुमति की जानकारी मांगे जाने पर संबंधित लोगों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि वन विभाग को इस संबंध में जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ वन एवं पर्यावरण संबंधी नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, इस मामले में डब्ल्यूसीएल प्रबंधन और वन विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संबंधित पेड़ों की कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी भी संस्था या व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन कर पेड़ों की कटाई की जाती है तो उस पर समान रूप से कार्रवाई होना आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।