पुरी रथ यात्रा 2026: सिंहद्वार पहुंचे तीनों दिव्य रथ, महाप्रभु की रथयात्रा का समय जारी

विश्व प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा 2026 को लेकर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने महाप्रभु की प्रमुख नीतियों और अनुष्ठानों का समय जारी कर दिया है। तीनों दिव्य रथ सिंहद्वार के सामने पहुंच चुके हैं। पहंडी, छेरा पंहरा और रथ खींचने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं तथा लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के बीच पुरी पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।

Jul 16, 2026 - 12:13
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पुरी रथ यात्रा 2026: सिंहद्वार पहुंचे तीनों दिव्य रथ, महाप्रभु की रथयात्रा का समय जारी

UNITED NEWS OF ASIA. ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पवित्र नगरी पुरी पूरी तरह से भक्तिमय वातावरण में डूबी हुई है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने रथ यात्रा के मुख्य दिन महाप्रभु की विभिन्न धार्मिक नीतियों और अनुष्ठानों का निर्धारित समय जारी कर दिया है। इसके साथ ही भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों भव्य रथ सिंहद्वार के सामने स्थापित कर दिए गए हैं।

श्रीमंदिर प्रशासन के अनुसार, रथ यात्रा के दिन सुबह से ही पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। तड़के मंगल आरती और अन्य दैनिक नीतियां संपन्न की जाएंगी। इसके बाद सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक पहंडी बिजे की रस्म होगी। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को पारंपरिक धाड़ी पहंडी शैली में गर्भगृह से बाहर लाकर उनके रथों पर विराजमान कराया जाएगा। इस दौरान पूरा वातावरण "जय जगन्नाथ" के उद्घोष से गूंज उठेगा।

प्रशासन के अनुसार, दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच पुरी के गजपति महाराज परंपरागत छेरा पंहरा की रस्म निभाएंगे। इस अनुष्ठान में गजपति महाराज सोने की झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह परंपरा भगवान के समक्ष सभी के समान होने का संदेश देती है और रथ यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक रस्मों में से एक मानी जाती है।

इसके बाद शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं द्वारा तीनों रथों को खींचने की शुरुआत होगी। लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को खींचकर श्री गुंडिचा मंदिर की ओर ले जाएंगे। इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने के लिए पुरी पहुंच चुके हैं।

रथ यात्रा से पहले श्रीमंदिर से आज्ञामाल मिलने के बाद तीनों रथों को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सिंहद्वार तक लाया गया। सबसे पहले भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ को, उसके बाद भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ और अंत में देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ को आज्ञामाल अर्पित की गई। इसके बाद सेवायतों, पुलिसकर्मियों और श्रद्धालुओं के सहयोग से तीनों रथों को सिंहद्वार के सामने स्थापित किया गया।

अब श्रद्धालुओं की निगाहें उस पावन क्षण पर टिकी हैं, जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गर्भगृह से बाहर निकलकर रथों पर विराजमान होंगे और जन-जन को दर्शन देंगे। विश्व प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा को लेकर पूरे ओडिशा में उत्साह और आस्था का माहौल बना हुआ है।