राष्ट्रीय ओबीसी महिला महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष रत्नमाला पिसे ने दोनों नेताओं से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं को अधिवेशन में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र भी सौंपा गया।
रत्नमाला पिसे ने बताया कि राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. बबराव तायवाडे और महासचिव सचिन राजुकर के नेतृत्व में देशभर में ओबीसी वर्ग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है। संगठन का उद्देश्य ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और उनकी मांगों को शासन एवं प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय महाअधिवेशन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इनमें ओबीसी की जातिवार जनगणना, जनगणना प्रपत्र में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम की व्यवस्था तथा मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर लागू 13 प्रतिशत की सीमा हटाने जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। इन विषयों पर आगे की रणनीति तैयार करने के लिए देशभर से संगठन के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिनिधि शामिल होंगे।
रत्नमाला पिसे ने कहा कि ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए सभी वर्गों का एकजुट होना आवश्यक है। उन्होंने समाज के लोगों से 7 अगस्त को बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय महाअधिवेशन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
मुलाकात के दौरान अधिवेशन की रूपरेखा, संगठनात्मक गतिविधियों और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की गई। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ का कहना है कि अधिवेशन में लिए जाने वाले निर्णय ओबीसी समाज के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने में सहायक होंगे।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ का यह अधिवेशन सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण से जुड़े विषयों पर देशभर के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का प्रयास माना जा रहा है, जहां भविष्य की रणनीति और संगठन के आगामी कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।