वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर रामेश्वर शर्मा का बयान, बोले- गंगा-जमुनी तहजीब में आपत्ति कैसी

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यह नया वक्फ अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब वाले देश में इस व्यवस्था पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए और इसका उद्देश्य पारदर्शिता तथा गरीबों के हितों की रक्षा करना है।

Jul 6, 2026 - 13:16
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वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर रामेश्वर शर्मा का बयान, बोले- गंगा-जमुनी तहजीब में आपत्ति कैसी

UNITED NEWS OF ASIA. मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वक्फ अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत बोर्ड का पुनर्गठन किया है और मध्यप्रदेश इस कानून के अनुसार वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि भारत की संस्कृति गंगा-जमुनी तहजीब की रही है, जहां सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश की सांस्कृतिक परंपरा साझा सहभागिता की रही है तो वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उनके अनुसार यह निर्णय कानून के अनुरूप लिया गया है और इसका उद्देश्य संस्थागत पारदर्शिता को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियां देश की भूमि का हिस्सा हैं और उनका उपयोग समाज के जरूरतमंद लोगों के हित में होना चाहिए। उनका कहना था कि वक्फ संपत्तियों का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या वर्ग विशेष का हित नहीं, बल्कि सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यदि इन संपत्तियों का सही उपयोग होगा तो इसका लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचेगा।

रामेश्वर शर्मा ने यह भी कहा कि जिस प्रकार सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास करती है, उसी प्रकार वक्फ से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड में शामिल किए गए हिंदू सदस्यों का उद्देश्य भी गरीबों और जरूरतमंद लोगों के हितों की रक्षा करना है।

भाजपा विधायक ने कहा कि इस फैसले से आम मुस्लिम समाज को किसी प्रकार की चिंता नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी वर्ग को आपत्ति है तो वह उन लोगों को हो सकती है जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सवालों के घेरे में रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संचालन सुनिश्चित करना है।

मध्यप्रदेश में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं। पक्ष और विपक्ष इस विषय पर अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि बोर्ड का गठन नए वक्फ अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।