निजी स्कूलों को सीएम रेखा गुप्ता की अंतिम चेतावनी, मनमानी फीस बढ़ाई तो होगी कड़ी कार्रवाई

दिल्ली सरकार ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ोतरी पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर जुर्माना, मान्यता रद्द करने और गंभीर मामलों में प्रबंधन का अधिग्रहण तक किया जा सकता है। सरकार ने सभी स्कूलों को 15 जुलाई 2026 तक शुल्क विनियमन समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

Jul 5, 2026 - 15:25
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निजी स्कूलों को सीएम रेखा गुप्ता की अंतिम चेतावनी, मनमानी फीस बढ़ाई तो होगी कड़ी कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली सरकार ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निजी स्कूलों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी स्कूल ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना फीस बढ़ाई या अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर आर्थिक दंड लगाने के साथ उनकी मान्यता रद्द करने और आवश्यकता पड़ने पर स्कूल प्रबंधन का अधिग्रहण करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का कहना है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।

इसी दिशा में दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई 2026 तक स्कूल स्तर पर शुल्क विनियमन समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति स्कूलों द्वारा प्रस्तावित किसी भी फीस वृद्धि की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि शुल्क में बढ़ोतरी केवल वास्तविक वित्तीय आवश्यकता और निर्धारित नियमों के अनुरूप ही हो। नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूल प्रबंधन अपनी इच्छा से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भी इस संबंध में स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल समिति की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने या शुल्क निर्धारण प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 का उद्देश्य फीस निर्धारण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। इसके तहत किसी भी स्कूल को छिपे हुए शुल्क या अनियमित फीस वृद्धि के माध्यम से अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने यह भी तय किया है कि शुल्क विनियमन समिति में अभिभावक और शिक्षक प्रतिनिधियों का चयन सार्वजनिक लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और सरकारी पर्यवेक्षक इसकी निगरानी करेंगे। स्कूलों को लॉटरी आयोजित करने से कम से कम सात दिन पहले सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी, ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

दिल्ली सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के अंतरिम निर्देशों के अनुसार नई शुल्क संरचना को अंतिम मंजूरी मिलने तक सभी निजी स्कूल शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अनुसार ही फीस वसूलेंगे। यदि किसी स्कूल ने इससे अधिक शुल्क लिया है, तो उसका अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के अनुसार होगा। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस की जाएगी या आगामी फीस में समायोजित की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य अभिभावकों के हितों की रक्षा करते हुए गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा सुनिश्चित करना है।