90 वर्षीय महिला का जटिल महाधमनी एन्यूरिज्म का सफल उपचार, छत्तीसगढ़ में रचा नया चिकित्सा इतिहास

रायपुर के एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल में 90 वर्षीय महिला का जटिल महाधमनी (एओर्टिक) एन्यूरिज्म का सफल एंडोवैस्कुलर उपचार किया गया। अस्पताल के अनुसार यह छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीज पर इस प्रकार की पहली सफल प्रक्रिया है। आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने लगभग साढ़े चार घंटे में यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।

Jul 5, 2026 - 15:18
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90 वर्षीय महिला का जटिल महाधमनी एन्यूरिज्म का सफल उपचार, छत्तीसगढ़ में रचा नया चिकित्सा इतिहास

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर स्थित एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 90 वर्षीय महिला का जटिल महाधमनी (एओर्टिक) एन्यूरिज्म का सफल उपचार किया है। अस्पताल के अनुसार यह छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीज पर इस प्रकार की पहली सफल एंडोवैस्कुलर एओर्टिक एन्यूरिज्म रिपेयर (ईवीएआर) प्रक्रिया है। इस सफलता ने यह साबित किया है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से अधिक आयु के मरीजों का भी सुरक्षित और प्रभावी उपचार संभव है।

जानकारी के अनुसार महिला मरीज पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं। विस्तृत जांच में उनकी महाधमनी के निचले हिस्से में 64 मिलीमीटर का बड़ा एन्यूरिज्म पाया गया, जिसमें रक्त का थक्का भी मौजूद था। विशेषज्ञों ने बताया कि यह स्थिति बेहद गंभीर थी, क्योंकि एन्यूरिज्म कभी भी फट सकता था और ऐसी स्थिति में मरीज की जान बचने की संभावना लगभग नहीं रहती। इसके अलावा मरीज की उम्र, पहले से मौजूद हृदय संबंधी समस्याएं तथा अत्यधिक घुमावदार रक्तवाहिनियां इस उपचार को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही थीं।

विशेषज्ञों ने पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय न्यूनतम इनवेसिव एंडोवैस्कुलर तकनीक (ईवीएआर) को सबसे सुरक्षित विकल्प चुना। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि एन्यूरिज्म को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए, जबकि किडनी और आंतों तक रक्त की आपूर्ति भी प्रभावित न हो। 26 जून 2026 को विशेषज्ञ टीम ने विशेष "रिवर्स स्लाइडिंग तकनीक" और बड़े आकार के स्टेंट ग्राफ्ट की सहायता से इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।

इस प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी ने किया। उनके साथ डॉ. मोहम्मद वसीम खान ने रक्तवाहिनी तक सुरक्षित पहुंच बनाकर स्टेंट स्थापित करने और प्रक्रिया के बाद रक्तस्राव रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. स्नेहा खोबरागड़े ने संभाली। लगभग चार घंटे 20 मिनट तक चली इस सर्जरी में 168 मिलीमीटर के एंडोवैस्कुलर स्टेंट ग्राफ्ट का उपयोग किया गया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के सफल रही और मरीज को चार दिन बाद स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक सफल सर्जरी नहीं, बल्कि प्रदेश में उन्नत कार्डियक उपचार की बढ़ती क्षमता का प्रमाण भी है। फैसिलिटी डायरेक्टर तपानी घोष ने कहा कि कार्डियक साइंसेज विभाग अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की मदद से हर आयु वर्ग के मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफलता भविष्य में गंभीर हृदय रोगों के उपचार के लिए मरीजों और चिकित्सकों दोनों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।