19 घंटे अंधेरे में डूबा अबूझमाड़, सरपंच और ग्रामीणों ने खुद जोड़ दी टूटी बिजली लाइन

नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ स्थित ओरछा में बिजली विभाग में नियमित लाइनमैन नहीं होने के कारण 19 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। तकनीकी दल के नहीं पहुंचने पर सरपंच, ग्रामीणों और विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर ने बारिश के बीच टूटी विद्युत लाइन की मरम्मत कर बिजली बहाल की। घटना के बाद दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

Jul 6, 2026 - 12:19
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19 घंटे अंधेरे में डूबा अबूझमाड़, सरपंच और ग्रामीणों ने खुद जोड़ दी टूटी बिजली लाइन

UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के मुख्यालय ओरछा में बिजली विभाग की व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब तकनीकी खराबी के कारण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति करीब 19 घंटे तक ठप रही। हैरानी की बात यह रही कि पूरे क्षेत्र में बिजली बहाल करने के लिए विभाग का नियमित लाइनमैन ही उपलब्ध नहीं था। अंततः सरपंच, ग्रामीणों और बिजली विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए बारिश के बीच टूटी विद्युत लाइन की मरम्मत की और बिजली आपूर्ति बहाल कराई।

ओरछा, जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 66 किलोमीटर दूर अबूझमाड़ के भीतरी इलाके में स्थित है। यह क्षेत्र लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सरकारी कार्यालयों का नियमित संचालन भी यहां नहीं हो पाता, जिसके कारण छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी लोगों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।

जानकारी के अनुसार विद्युत लाइन में तकनीकी खराबी आने के बाद ओरछा सहित आसपास के कई गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। लगातार 19 घंटे तक बिजली नहीं रहने से लोगों को पेयजल, संचार सेवाओं, छोटे व्यापार और दैनिक जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जब लंबे इंतजार के बाद भी विभाग की ओर से कोई तकनीकी दल मौके पर नहीं पहुंचा, तब स्थानीय स्तर पर पहल करते हुए सरपंच और ग्रामीणों ने स्वयं समाधान निकालने का निर्णय लिया।

बिजली विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर के सहयोग से ग्रामीण बारिश के बीच जंगलों तक पहुंचे और क्षतिग्रस्त विद्युत लाइन की मरम्मत का कार्य किया। काफी प्रयासों के बाद टूटे हुए तारों को जोड़कर बिजली आपूर्ति फिर से शुरू कराई गई। स्थानीय लोगों ने इस कार्य को सामूहिक प्रयास और जनसहयोग का उदाहरण बताया, लेकिन साथ ही इसे सरकारी व्यवस्था की गंभीर विफलता भी माना।

ग्रामीणों का कहना है कि ओरछा फीडर से अबूझमाड़ के कई गांवों में बिजली आपूर्ति होती है। ऐसे में यदि इस फीडर में कोई खराबी आती है तो पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। इसके बावजूद इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में नियमित लाइनमैन की नियुक्ति नहीं होना चिंता का विषय है।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब अबूझमाड़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बात की जाती है, तब वहां बिजली जैसी बुनियादी सेवा के लिए भी स्थायी तकनीकी अमला उपलब्ध क्यों नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ओरछा में नियमित लाइनमैन की नियुक्ति की जाए, आपातकालीन विद्युत व्यवस्था को मजबूत किया जाए और दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक सरकारी सेवाओं की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि जनसहयोग सराहनीय है, लेकिन वह सरकारी व्यवस्था का विकल्प नहीं बन सकता।