अक्षय तृतीया से पहले बाल विवाह पर सख्ती, आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के कड़े निर्देश
अक्षय तृतीया से पहले छत्तीसगढ़ में बाल विवाह रोकने के लिए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्ती बढ़ा दी है। अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों को टीम गठन, जागरूकता और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। अक्षय तृतीया जैसे पारंपरिक पर्व के मद्देनजर छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर प्रशासन ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। 10 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाल विवाह रोकने के लिए हर स्तर पर सख्ती और सजगता सुनिश्चित की जाए।
इस बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलावार समीक्षा की गई, जिसमें बाल विवाह रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली गई और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
डॉ. शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में बाल विवाह के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मुनादी, प्रचार-प्रसार, बैठकों और नवाचारों का व्यापक उपयोग किया जाए। साथ ही, प्रत्येक जिले में विशेष टीमों का गठन कर उन्हें सक्रिय रखने पर जोर दिया गया, ताकि किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
बैठक में विभिन्न जिलों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना भी की गई। कांकेर जिले में चल रहे “मेरी आवाज सुनो” अभियान के तहत किशोरियों को अपनी बात रखने का मंच दिया जा रहा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठा पा रही हैं। वहीं बीजापुर जिले में “बीजा दूतिन” पहल के माध्यम से किशोर-किशोरियां स्वयं जागरूकता फैलाने में भूमिका निभा रहे हैं।
सुकमा और जशपुर जिलों में स्थानीय भाषाओं—गोंडी, सादरी और कुरुख में जागरूकता अभियान चलाए जाने को भी आयोग ने सराहा। इससे स्थानीय समुदायों तक संदेश प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। सूरजपुर जिले में बाल विवाह के मामलों में लगातार कमी आना और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक बालिका द्वारा स्वयं अपने बाल विवाह को रोकने के लिए सूचना देना, इन प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देश दिए कि 14 अप्रैल को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम को प्रमुख एजेंडा बनाया जाए। साथ ही बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 का व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चे और उनके परिजन तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। स्वयंसेवी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर निरंतर निगरानी रखने की भी सलाह दी गई।
यह स्पष्ट है कि राज्य में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए प्रशासन और आयोग पूरी तरह सक्रिय हैं। अक्षय तृतीया जैसे अवसर पर विशेष सतर्कता बरतते हुए सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी कीमत पर बाल विवाह की घटनाओं को रोका जाए और समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए।