न्यायपालिका की ताकत दक्षता और निष्पक्षता में: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा
दुर्ग में आयोजित संभागीय न्यायिक सेमीनार में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायिक अधिकारियों को आधुनिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और डिजिटल साक्ष्य की समझ विकसित करने पर जोर दिया। सेमीनार में 92 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला न्यायालय में आयोजित एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार में न्यायपालिका की भूमिका और आधुनिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पांच सिविल जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की।
सेमीनार के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय थे। उनके साथ न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जो न्याय और विधिक ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक रहा।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका की वास्तविक शक्ति उसकी दक्षता, निष्पक्षता और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता में निहित है। उन्होंने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इन कानूनों में तकनीकी प्रगति को समाहित किया गया है और यह पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं।
उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को इन नए कानूनों की गहन और व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया, ताकि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समयबद्ध बन सके। विशेष रूप से उन्होंने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए नवाचारी प्रकरण प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सेमीनार में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (ई-साक्ष्य) के बढ़ते महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डिजिटल युग में न्यायिक अधिकारियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ग्राह्यता और उनके वैधानिक प्रावधानों की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत ई-साक्ष्य की भूमिका को स्पष्ट करते हुए अधिकारियों को इस दिशा में सतत अध्ययन करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान “मध्यस्थता 2.0 IAISAGR – दुर्ग के लिए मध्यस्थता रणनीति मॉडल” नामक एक महत्वपूर्ण प्रकाशन का विमोचन भी किया गया। यह पहल विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में न्यायपालिका की प्रगतिशील सोच को दर्शाती है।
सेमीनार में विभिन्न विधिक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतिकरण दिए गए, जिनमें सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे की रणनीतियां, बीएनएसएस के अंतर्गत अभियुक्त परीक्षण और ई-साक्ष्य से जुड़े प्रावधान शामिल रहे। इसके अलावा नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रिफ्रेशर कोर्स का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा और राजनांदगांव जिलों के न्यायिक अधिकारी, रजिस्ट्रार जनरल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए विभिन्न विषयों पर चर्चा की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
यह सेमीनार न्यायिक अधिकारियों के ज्ञान और कौशल को सुदृढ़ करने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।