राहुल गांधी की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय को नोटिस

मानहानि मामले में जारी समन के खिलाफ राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कार्तिकेय सिंह को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को तय की गई है।

Apr 11, 2026 - 18:36
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राहुल गांधी की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय को नोटिस

UNITED NEWS OF ASIA.  घनश्याम शर्मा। मध्यप्रदेश में एक चर्चित मानहानि मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में हुई।

दरअसल, यह मामला आपराधिक मानहानि से जुड़ा हुआ है, जिसमें भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किए गए थे। इन समनों को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि मामले में अनावेदक पक्ष को सुनना भी आवश्यक है। इसी आधार पर कोर्ट ने कार्तिकेय सिंह को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उनका पक्ष भी सुना जा सके। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह ने भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में आरोप लगाया गया था कि 29 अक्टूबर 2018 को झाबुआ में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक मामले में कार्तिकेय सिंह का नाम लिया था, जिससे उनकी और उनके परिवार की छवि को नुकसान पहुंचा।

इस शिकायत के आधार पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने दिसंबर 2024 में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करते हुए राहुल गांधी को समन जारी किए थे। इसी समन के खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि मई 2025 के बाद की ऑर्डर शीट रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इस पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि मई 2025 के बाद की सभी ऑर्डर शीट प्रस्तुत की जाएं, ताकि मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो सके।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पैरवी की और अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। अब इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों के बाद ही आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है। आने वाले समय में इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।