अमेरिका ने ईरान पर किया अब तक का सबसे बड़ा हमला, 140 सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर युद्ध में बदल गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के 14 प्रांतों में 140 सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव गहरा गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका और ईरान के बीच कुछ समय की शांति के बाद एक बार फिर सैन्य संघर्ष तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई कार्रवाई की पुष्टि की है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के 14 प्रांतों में स्थित लगभग 140 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य मिसाइल लॉन्च सिस्टम, ड्रोन क्षमताओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाना बताया गया है।
बताया गया है कि हमले बंदर अब्बास, बुशेहर, जास्क, क़ेश्म द्वीप, सीरिक, खुज़ेस्तान, अहवाज और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किए गए। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों के दौरान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर F-22 Raptor, B-1B Lancer और B-2 Spirit जैसे रणनीतिक लड़ाकू विमानों की तस्वीरें साझा कीं। इसे अमेरिका की सैन्य क्षमता और तैयारियों का संदेश माना जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस समेत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। IRGC ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने हेलिकॉप्टर रखरखाव केंद्र, ड्रोन कमांड सेंटर और अन्य सैन्य सुविधाओं पर कार्रवाई की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिका या बहरीन की ओर से तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस संघर्ष के बीच रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से सैन्य गतिविधियां जारी हैं और हालात लगातार बदल रहे हैं।