एआई और सैटेलाइट तकनीक से होगी फसलों की निगरानी, किसानों को समय रहते मिलेगी खतरे की चेतावनी

केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट और मशीन लर्निंग की मदद से किसानों को सूखा, बाढ़, खराब मौसम और कीटों के खतरे की समय रहते जानकारी दी जाएगी। कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) और राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) के माध्यम से देशभर में आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

Jul 26, 2026 - 12:07
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एआई और सैटेलाइट तकनीक से होगी फसलों की निगरानी, किसानों को समय रहते मिलेगी खतरे की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों को फसल नुकसान से बचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। संसद में उठाए गए एक प्रश्न के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने बताया कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट निगरानी और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर फसलों पर आने वाले संभावित खतरों का पहले से आकलन किया जा रहा है। इससे किसानों को समय रहते चेतावनी और आवश्यक सलाह उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यह विषय राज्यसभा में सांसद लक्ष्मी वर्मा द्वारा उठाया गया, जिन्होंने सरकार से पूछा कि क्या फसल हानि को कम करने के लिए उपग्रह आधारित निगरानी और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली लागू की जा रही है तथा क्या छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा।

जवाब में कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (Decision Support System-DSS) पहले से ही देश के सभी राज्यों, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है, में कार्यरत है। यह प्रणाली उपग्रह चित्रों, मौसम संबंधी आंकड़ों, मिट्टी की स्थिति, फसल की प्रगति, जलाशयों और भूजल से संबंधित सूचनाओं का विश्लेषण करती है। इसके माध्यम से सूखा, बाढ़, अत्यधिक वर्षा और अन्य प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी की जाती है, जिससे किसानों को समय पर फसल प्रबंधन संबंधी सलाह मिलती है।

सरकार ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (National Pest Surveillance System-NPSS) किसानों के लिए एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित की गई है। यह एआई और मशीन लर्निंग की सहायता से खेतों में कीटों की पहचान, उनकी गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण के लिए विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराती है। प्रणाली एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को बढ़ावा देती है और सबसे पहले जैविक तथा जैव-नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह देती है। रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग की अनुशंसा केवल आवश्यकता होने पर और निर्धारित मात्रा में ही की जाती है।

कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) भी संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत बुआई से लेकर कटाई के बाद तक होने वाले फसल नुकसान को बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है।

सरकार ने खरीफ 2023 से YES-TECH प्रणाली भी लागू की है, जिसके माध्यम से उपग्रह इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग कर फसल उत्पादन का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है। हालांकि, केंद्र सरकार के अनुसार छत्तीसगढ़ ने अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इस तकनीक को लागू नहीं किया है।

इसके अलावा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) किसानों के लिए एआई आधारित मौसम और मानसून सलाह भी जारी कर रहा है। स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर दी जाने वाली यह सेवा अब तक लगभग 5.28 करोड़ किसानों तक पहुंच चुकी है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किसानों को समय पर जानकारी मिलेगी, फसल नुकसान कम होगा और कृषि उत्पादन को अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ बनाया जा सकेगा।