इस कायाकल्प को जमीन पर उतारने में डॉ. प्रशांत सिंह और डॉ. बलवंत सिंह की अहम भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन और निरंतर निगरानी से अस्पताल अब जिले का सबसे हाई-टेक स्वास्थ्य केंद्र बन गया है।
अस्पताल में प्रवेश करते ही मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का अनुभव होता है। हाई-टेक ओपीडी काउंटर के माध्यम से मरीजों का कंप्यूटरीकृत पंजीकरण किया जा रहा है, जिससे समय की बचत हो रही है। आपातकालीन कक्ष को भी अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है, ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।
विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए ‘एनसीडी विंडो’ शुरू की गई है, जहां 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को अलग से सुविधा दी जा रही है। साथ ही मितानिन हेल्प डेस्क के माध्यम से मरीजों को मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
आंखों के इलाज के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। अब अस्पताल में अत्याधुनिक आई ऑपरेशन थियेटर तैयार है, जहां मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का इलाज संभव है। इससे क्षेत्र के मरीजों को अब शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
तकनीकी सुविधाओं की बात करें तो अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे और आधुनिक सोनोग्राफी सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो रही है, जिन्हें पहले जांच के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता था।
नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए एनबीएसयू (Newborn Stabilization Unit) वार्ड को भी अपग्रेड किया गया है। यहां कम वजन और समय से पूर्व जन्मे बच्चों के लिए विशेष मशीनें और सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रसव कक्ष को भी आधुनिक और संक्रमण मुक्त बनाया गया है, जिससे सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।
अस्पताल परिसर की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पूरे परिसर को साफ-सुथरा रखते हुए आकर्षक गार्डन विकसित किया गया है, जो मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक सुकून प्रदान करता है।
यह पूरा परिवर्तन ‘कायाकल्प अभियान’ के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करना है। सोनहत अस्पताल ने इस अभियान के सभी मानकों को प्रभावी रूप से लागू कर एक नई मिसाल पेश की है।
आज यह अस्पताल न केवल कोरिया जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन गया है, जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की नई दिशा दिखा रहा है।