मारंगपुरी में साहू समाज का वार्षिक अधिवेशन संपन्न, पूर्व विधायक संतराम नेताम ने किया भवन लोकार्पण

मारंगपुरी में साहू समाज के वार्षिक अधिवेशन में संतराम नेताम शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने समाज के नए भवन का लोकार्पण कर एकता और विकास पर जोर दिया।

Mar 17, 2026 - 18:39
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मारंगपुरी में साहू समाज का वार्षिक अधिवेशन संपन्न, पूर्व विधायक संतराम नेताम ने किया भवन लोकार्पण

UNITED NEWS OF ASIA. राज पांडेय, केशकाल | मारंगपुरी में साहू समाज द्वारा आयोजित वार्षिक अधिवेशन इस वर्ष भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विश्रामपुरी/माकड़ी परिक्षेत्र के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक संतराम नेताम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई, जिसमें साहू समाज द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान सभी अतिथियों का तिलक चंदन से स्वागत किया गया। इसके पश्चात संत शिरोमणि भक्त माता कर्मा की पूजा-अर्चना और आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

मुख्य अतिथि संतराम नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज लगातार हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उन्होंने समाज की एकता और संगठन शक्ति की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े समाजों में से एक होने के नाते साहू समाज की जिम्मेदारी है कि वह अन्य समाजों को भी साथ लेकर आगे बढ़े।

उन्होंने बताया कि पूर्व में उन्होंने अपनी विधायक निधि से मारंगपुरी में साहू समाज के भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये की राशि प्रदान की थी, जिससे आज यह भव्य भवन बनकर तैयार हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया और इसे समाज के विकास और प्रगति का प्रतीक बताया।

संतराम नेताम ने कहा कि जब कोई कार्य समाज के सामूहिक प्रयासों से पूरा होता है, तो उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने वार्षिक अधिवेशन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताते हुए आयोजन समिति और समाज के पदाधिकारियों को बधाई दी।

इस अवसर पर समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें गिरवर साहू, श्यामलाल साहू, राजेश साहू, श्यामा साहू, जगत साहू, सरपंच रविशंकर मरकाम और कमलेश ठाकुर प्रमुख रूप से शामिल थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन और भी भव्य बन गया।

यह अधिवेशन न केवल सामाजिक एकता का प्रतीक रहा, बल्कि समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।