कलेक्टर नम्रता जैन ने रामकीर्तन मरकाम को शाल, श्रीफल और उनके नाम की नेम प्लेट भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण, नवाचार और विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी को देखते हुए प्रदान किया गया।
जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यों को बेहतर तरीके से क्रियान्वित करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक सप्ताह आयोजित होने वाली समय-सीमा बैठक में ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर सम्मानित किया जा रहा है, जिससे अन्य कर्मचारियों को भी प्रेरणा मिल सके।
रामकीर्तन मरकाम ने अपने विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई नवाचार किए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने, पढ़ाई को रोचक बनाने और विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए। उनके इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव छात्रों के प्रदर्शन और अनुशासन में स्पष्ट रूप से देखा गया है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षक समाज के भविष्य निर्माता होते हैं। उन्होंने रामकीर्तन मरकाम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के समर्पित और नवाचारी शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों से भी इसी प्रकार लगन और निष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकांक्षा शिक्षा खालको, अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई और जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल सहित जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने श्री मरकाम के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।
यह पहल न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने का कार्य कर रही है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को भी बढ़ावा दे रही है। इससे जिले में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल बन रहा है और कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, नारायणपुर जिला प्रशासन की यह पहल शिक्षा और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक सराहनीय कदम है, जो भविष्य में और भी बेहतर परिणाम देने की उम्मीद जगाती है।