संसद में बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया विषैले SPL कचरे का मुद्दा, अवैध कोयला मिलावट पर सख्त कार्रवाई की मांग
लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एल्युमिनियम उद्योगों से निकलने वाले विषैले स्पेंट पॉट लाइनिंग (SPL) कचरे के अवैध निपटान और कोयले में मिलावट का मुद्दा उठाया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि SPL की कोयले में मिलावट पूरी तरह गैर-कानूनी है और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा के मानसून सत्र के पहले दिन एल्युमिनियम उद्योगों से निकलने वाले अति-विषैले अपशिष्ट स्पेंट पॉट लाइनिंग (SPL) के अवैध निपटान और वाणिज्यिक कोयले में इसकी कथित मिलावट का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने इस विषय को जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताते हुए केंद्र सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
लोकसभा में प्रश्न उठाते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जानकारी मांगी कि क्या औद्योगिक इकाइयों द्वारा विषैले SPL को वाणिज्यिक कोयले में मिलाकर बेचे जाने की शिकायतों की जांच की गई है और ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने एल्युमिनियम उद्योगों की पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) रिपोर्टों के संदर्भ में भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
सांसद ने सीमेंट उद्योगों में SPL के सुरक्षित निपटान, पिछले पांच वर्षों में दर्ज उल्लंघनों तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले तृतीय-पक्ष विक्रेताओं की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी विक्रेता की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी पर भी तय की जानी चाहिए। साथ ही एल्युमिनियम संयंत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने सदन में जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक कोयले में SPL की मिलावट पूरी तरह गैर-कानूनी है। उन्होंने बताया कि खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन तथा सीमापार परिवहन) नियम, 2016 के तहत SPL को अति-खतरनाक अपशिष्ट की श्रेणी में रखा गया है। इसका निपटान केवल अधिकृत रीसाइक्लर्स अथवा अधिकृत TSDF सुविधाओं के माध्यम से ही किया जा सकता है।
सरकार ने यह भी बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयंत्र बंद करने, पर्यावरणीय जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही 1 अप्रैल 2026 से विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व्यवस्था लागू होने के बाद एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों के लिए सीपीसीबी के डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण और विषैले कचरे के सुरक्षित प्रबंधन की जिम्मेदारी अनिवार्य कर दी गई है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक प्रमुख औद्योगिक राज्य है, जहां कई एल्युमिनियम संयंत्र संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य, स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु और पर्यावरण सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अपेक्षा की कि एल्युमिनियम संयंत्रों, तृतीय-पक्ष विक्रेताओं और सीमेंट उद्योगों की नियमित निगरानी की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनके अनुसार स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।