‘युवाओं को नहीं संभाला गया तो बोझ बन जाएंगे’, मोहन भागवत ने युवाओं की भूमिका को लेकर किया आगाह

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में मोहन भागवत ने तिरंगा फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि सही दिशा और अवसर मिलने पर युवा जनसांख्यिकीय लाभांश साबित होंगे, जबकि उनकी क्षमता का समुचित उपयोग नहीं किया गया तो वे समाज पर बोझ बन सकते हैं। उन्होंने भारत को सुरक्षित, समृद्ध और विश्वगुरु बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।

Aug 15, 2026 - 12:12
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‘युवाओं को नहीं संभाला गया तो बोझ बन जाएंगे’, मोहन भागवत ने युवाओं की भूमिका को लेकर किया आगाह

UNITED NEWS OF ASIA. नागपुर। देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराया। ध्वजारोहण के बाद उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भारत की स्वतंत्रता, देश की सुरक्षा, समृद्धि और भविष्य की चुनौतियों को लेकर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्र था, स्वतंत्र है और स्वतंत्र रहेगा, लेकिन देश को सुरक्षित, खुशहाल और समृद्ध बनाने के साथ ही पूरी मानवता के लिए सार्थक योगदान देने वाला राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी अभी जारी है।

मोहन भागवत ने युवाओं को देश की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उन्हें जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं की बड़ी आबादी देश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यदि युवाओं को उचित शिक्षा, कौशल, दिशा और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि युवाओं की क्षमता और ऊर्जा का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया तो यही जनसांख्यिकीय लाभांश भविष्य में समाज के लिए बोझ बन सकता है।

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए केवल सरकार या किसी एक संस्था की भूमिका पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए देश के विकास में योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा राष्ट्र बनाना है जो अपनी प्रगति के साथ पूरी मानवता के कल्याण और जीवन में सार्थक योगदान दे सके।

उन्होंने देश के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका सामना अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटके बिना करना होगा। भारत को सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल बनाने के लिए समाज में जिम्मेदारी, अनुशासन और सहयोग की भावना को मजबूत करना आवश्यक है।

मोहन भागवत ने लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विचार होना लोकतंत्र की पहचान है और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना आवश्यक है। विरोध और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन इसके साथ अपनी जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने संविधान निर्माण में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान बनाते समय लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ी इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा गया था। उन्होंने देशवासियों से लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।