सेवा संकल्प अभियान के तहत केवीके कवर्धा में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुरू

कवर्धा में सेवा संकल्प अभियान के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा ग्रामीण युवाओं के लिए मशरूम उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले प्रशिक्षण में कबीरधाम जिले के 30 ग्रामीण युवा शामिल हो रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान व्यावसायिक मशरूम उत्पादन, उत्पादन इकाई के लिए स्थान चयन, स्वच्छता, जैव-सुरक्षा, रोग एवं कीट प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण और विपणन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।

Sep 29, 2026 - 19:55
 0  2
सेवा संकल्प अभियान के तहत केवीके कवर्धा में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुरू

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा द्वारा ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित आजीविका से जोड़ने और आवश्यक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का आयोजन निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर डॉ. एस. एस. टुटेजा और निदेशक, अटारी जबलपुर डॉ. एस. आर. के. सिंह के मार्गदर्शन तथा कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा के प्रमुख डॉ. बी. पी. त्रिपाठी के नेतृत्व में किया जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा के प्रमुख डॉ. बी. पी. त्रिपाठी के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने अतिथियों और प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अटारी जबलपुर के निदेशक डॉ. एस. आर. के. सिंह ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। विशिष्ट अतिथि के रूप में पीजी महाविद्यालय कवर्धा की प्राचार्य डॉ. ऋचा मिश्रा और सहायक प्राध्यापक डॉ. कविता कनौज उपस्थित रहीं।

डॉ. एस. आर. के. सिंह ने प्रशिक्षणार्थी ग्रामीण युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन और इसके मूल्य संवर्धन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन कम स्थान में भी शुरू किया जा सकने वाला कृषि आधारित व्यवसाय है। आवश्यक कौशल और उचित प्रबंधन के साथ इसे आय के साधन के रूप में अपनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को व्यावहारिक रूप से अपनाने का आह्वान किया।

डॉ. ऋचा मिश्रा और डॉ. कविता कनौज ने भी ग्रामीण युवाओं को मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के उपयोग के माध्यम से मशरूम उत्पादन को आय का अतिरिक्त और व्यावहारिक माध्यम बनाने की संभावनाओं पर बात रखी।

प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एन. सी. बंजारा और डॉ. सी. पी. राहंगडाले द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें व्यावसायिक मशरूम उत्पादन, उत्पादन इकाई के लिए स्थान चयन, स्वच्छता एवं जैव-सुरक्षा, उत्पादन प्रबंधन, रोग एवं कीट प्रबंधन, मशरूम प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, भंडारण और विपणन जैसे विषय शामिल हैं।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में कबीरधाम जिले के 30 ग्रामीण युवा सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन एवं समन्वय कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. सी. पी. राहंगडाले द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में डॉ. बी. एस. परिहार, डॉ. टी. एस. सोनवानी, कार्यक्रम सहायक योगेश कुमार कौशिक सहित केन्द्र के कर्मचारी मौजूद रहे।