एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण से बचाव और भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से जिले में टीकाकरण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिले में एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत 16 मार्च 2026 को जिला चिकित्सालय कबीरधाम से की गई थी।
वर्तमान में रविवार और शासकीय अवकाश को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एचपीवी टीकाकरण किया जा रहा है। जिला चिकित्सालय के अलावा जिले के सभी 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा कोल्ड चेन सुविधा वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। स्कूलों में भी पात्र बालिकाओं का चिन्हांकन कर टीकाकरण किया जा रहा है।
14 से 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को लगेगा टीका
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सलिल मिश्रा के अनुसार, 14 वर्ष से अधिक एवं 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को एचपीवी का टीका लगाया जाना है। आयु का निर्धारण आधार कार्ड अथवा जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाएगा।
टीकाकरण के दौरान बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी वैक्सीन के महत्व की जानकारी भी दी जा रही है। विद्यालय स्तर पर पात्र बालिकाओं की पहचान के साथ अभिभावकों की सहमति लेने की प्रक्रिया भी की जा रही है।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के समन्वय से जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ताकि कोई भी पात्र बालिका टीकाकरण से वंचित न रहे। अभियान के तहत पात्र बालिकाओं तक पहुंचने और निर्धारित समय-सीमा में टीकाकरण पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
12,004 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार जिले में कुल 12,004 बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि पात्र बालिकाओं को निर्धारित समय पर एचपीवी का टीका जरूर लगवाएं।
जारी जानकारी के अनुसार, एचपीवी टीकाकरण को सर्वाइकल कैंसर से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण उपाय बताया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि वर्ष 2022 में विश्वभर में सर्वाइकल कैंसर से लगभग 3.50 लाख महिलाओं की मृत्यु हुई। साथ ही सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99 प्रतिशत मामले उच्च जोखिम वाले एचपीवी संक्रमण से जुड़े बताए गए हैं।
जिले में अभियान का उद्देश्य पात्र बालिकाओं का समय पर टीकाकरण कर एचपीवी संक्रमण से बचाव और भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में प्रयास करना है।