दोना-पत्तल मशीन के नाम पर कथित ठगी का मामला गहराया, कई राज्यों के पीड़ित सामने आए, मुख्य आरोपी शैलेन्द्र रजक गिरफ्तार
रायपुर के सरोना स्थित भारती महिला शक्ति फाउंडेशन पर दोना-पत्तल और नोटबुक मशीन उपलब्ध कराने के नाम पर कथित ठगी का मामला गहराता जा रहा है। विभिन्न राज्यों के पीड़ितों ने लाखों रुपये लेने और वादे पूरे नहीं करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने डी.डी. नगर थाने में मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी शैलेन्द्र रजक को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के सरोना स्थित भारती महिला शक्ति फाउंडेशन पर दोना-पत्तल, नोटबुक और अन्य मशीनों की बिक्री के नाम पर कथित ठगी का मामला लगातार गहराता जा रहा है। विभिन्न राज्यों के कई लोगों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने स्वरोजगार और नियमित आय का भरोसा देकर लाखों रुपये लिए, लेकिन वादे के अनुरूप मशीनें, कच्चा माल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी शैलेन्द्र रजक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ितों के अनुसार कंपनी व्यवसाय स्थापित कराने, मशीन उपलब्ध कराने, तैयार माल खरीदने (बाय-बैक सिस्टम) तथा हर महीने 60 से 70 हजार रुपये तक की आय का दावा करती थी। इसी भरोसे पर छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार और ओडिशा सहित कई राज्यों के लोगों ने कंपनी को बड़ी राशि का भुगतान किया। हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भुगतान के बाद न तो समय पर मशीनें मिलीं और न ही व्यवसाय शुरू कराने के लिए किए गए वादे पूरे किए गए।
मामले में बिलासपुर निवासी शशि चौबे भी सामने आई हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने दोना-पत्तल मशीन लगाने के लिए कंपनी को 8 लाख 40 हजार रुपये का भुगतान किया था, लेकिन आज तक उन्हें मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि कंपनी ने व्यवसाय शुरू कराने और नियमित आय का भरोसा दिया था, लेकिन भुगतान के बाद उनसे संपर्क भी कम कर दिया गया।
इसी तरह ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी सुरेश कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने वर्ष 2025 में नोटबुक मशीन लगाने के लिए 18 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर कंपनी संचालक को भुगतान किया था। इसके बावजूद उनका व्यवसाय शुरू नहीं हो सका और उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलीं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कंपनी दोना-पत्तल मशीन, कच्चे माल की आपूर्ति, मशीन इंस्टॉलेशन और तैयार माल की खरीद जैसे कई आकर्षक दावे करती थी। आरोप है कि कई लोगों को मशीनें महीनों की देरी से मिलीं, जबकि कुछ लोगों को मशीन मिलने के बाद भी इंस्टॉलेशन और संचालन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। कई पीड़ितों का यह भी आरोप है कि बाद में कंपनी के जिम्मेदार लोगों ने फोन उठाना और संपर्क करना बंद कर दिया।
पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर रायपुर के डी.डी. नगर थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी शैलेन्द्र रजक को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस बैंक लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य शिकायतों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले को लेकर 29 जून को रायपुर प्रेस क्लब में विभिन्न राज्यों के पीड़ितों ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर अपने दस्तावेज और आरोप सार्वजनिक किए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई तथा कथित रूप से जमा कराई गई राशि वापस दिलाने की मांग की है।