सुकमा में महिला आयोग की जनसुनवाई में बड़े फैसले, दो सरकारी कर्मचारियों पर एफआईआर के निर्देश

सुकमा में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान महिलाओं से जुड़े कई मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। आयोग ने दो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए, एक पीड़िता को 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दिलाई तथा दो महिलाओं के लिए मासिक भरण-पोषण राशि तय की। सिंदूरगुड़ा गांव की घटना की जांच भी डीएफओ को सौंपी गई है।

Jul 1, 2026 - 11:53
 0  48
सुकमा में महिला आयोग की जनसुनवाई में बड़े फैसले, दो सरकारी कर्मचारियों पर एफआईआर के निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी, सुकमा l छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की ओर से सुकमा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान महिलाओं से जुड़े विभिन्न मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने सुनवाई के दौरान कई शिकायतों पर गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के उत्पीड़न, शोषण और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनसुनवाई के दौरान दो अलग-अलग मामलों में सरकारी सेवकों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए डीएसपी सुकमा को निर्देश दिए गए। आयोग ने दोनों मामलों को गंभीर मानते हुए पुलिस से नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

एक मामले में आयोग के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता को अनावेदक से 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दिलाई गई। वहीं दो अन्य मामलों में महिलाओं के भरण-पोषण से संबंधित शिकायतों पर सुनवाई करते हुए आयोग ने संबंधित पक्षों को क्रमशः 8 हजार रुपये और 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि देने के निर्देश दिए। आयोग ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना भी न्याय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सुनवाई के दौरान एक आरक्षक के खिलाफ पहली पत्नी को विधिवत तलाक दिए बिना दूसरा विवाह करने का आरोप सामने आया। इस मामले में आयोग ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित विभाग को चेतावनी दी कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ सेवा समाप्ति की अनुशंसा भी की जाएगी।

इसी प्रकार एक अन्य मामले में सीआरपीएफ के एक जवान पर विवाह का झांसा देकर कई वर्षों तक महिला का कथित रूप से शोषण करने का आरोप लगाया गया। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने डीएसपी सुकमा को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए तथा संबंधित विभाग को कर्मचारी की सेवा समाप्ति के लिए अनुशंसा भेजने की बात भी कही।

जनसुनवाई के दौरान सिंदूरगुड़ा गांव में महिलाओं के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया। इस प्रकरण में आयोग ने विस्तृत जांच के लिए डीएफओ सुकमा को जिम्मेदारी सौंपी है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

किरणमयी नायक ने कहा कि महिला आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों की सुनवाई करना नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय दिलाना और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि आयोग भविष्य में भी महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए इसी तरह सक्रियता से कार्य करता रहेगा।