सराईपाली में 50 से अधिक परिवारों की हुई घर वापसी, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के नेतृत्व में वैदिक विधि से 104 लोगों ने किया सनातन धर्म में पुनः प्रवेश

सराईपाली स्थित स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल में आयोजित वैदिक श्रीराम कथा एवं महायज्ञ के दौरान प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के नेतृत्व में 50 से अधिक परिवारों के 104 लोगों की विधिवत घर वापसी कराई गई।

Jan 16, 2026 - 17:52
 0  6
सराईपाली में 50 से अधिक परिवारों की हुई घर वापसी, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के नेतृत्व में वैदिक विधि से 104 लोगों ने किया सनातन धर्म में पुनः प्रवेश

UINITED NEWS OF ASIA. हसिब अख्तर, रायपुर  सराईपाली। माँ रुद्रेश्वरी की पावन धरा पर स्थित स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल, कटंगपाली (सराईपाली) में दिनांक 15 जनवरी 2026 को आयोजित पाँच दिवसीय “संगीतमय वैदिक श्रीराम कथा एवं विश्व कल्याण महायज्ञ” के दौरान एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण देखने को मिला। इस अवसर पर अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख एवं भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के नेतृत्व में 50 से अधिक परिवारों के कुल 104 व्यक्तियों की विधिवत घर वापसी कराई गई।

घर वापसी का यह कार्यक्रम वैदिक परंपराओं के अनुसार “पैर पखारकर”, वैदिक मंत्रोच्चारण, यज्ञ एवं धार्मिक संस्कारों के माध्यम से संपन्न हुआ। आयोजन महर्षि दयानंद मठ धर्मार्थ ट्रस्ट एवं समस्त सनातनियों के संयुक्त तत्वाधान में किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण निर्मित हो गया।

इस पावन अवसर पर कथा वाचिका विदुषी अंजली आर्या (हरियाणा) रविन्द्रदास महाराज, यज्ञ ब्रह्मा डॉ. कमल नारायण आर्य, आचार्य राकेश आर्य कपिल शास्त्री, ठाकुर रामचतुर्भुज आर्यऋषि राज, मदन अग्रवाल अंजू गावेल रिंकू पाण्डेय, एम. लक्ष्मी नंदलाल यादव सहित अनेक संत-महात्मा, विद्वान आचार्य, जनजातीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि धर्मांतरण के कारण देश की जनसांख्यिकी में बड़ा परिवर्तन हो रहा है, जो राष्ट्र सुरक्षा के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि “देश से बड़ा कुछ नहीं होता और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है।” उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव द्वारा प्रारंभ किए गए घर वापसी अभियान को जीवनपर्यंत आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

उन्होंने समाज से सनातन संस्कृति, परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ। यह आयोजन धार्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रहित की भावना को भी सशक्त करने वाला सिद्ध हुआ।