मालदा की अदीना मस्जिद के बाहर शिवलिंग स्थापना की घोषणा से विवाद, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले स्थित 650 वर्ष पुरानी अदीना मस्जिद के बाहर शिवलिंग स्थापित करने की घोषणा के बाद विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठन मस्जिद को प्राचीन आदिनाथ मंदिर पर निर्मित होने का दावा कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध करते हुए यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है।

Jul 27, 2026 - 15:53
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मालदा की अदीना मस्जिद के बाहर शिवलिंग स्थापना की घोषणा से विवाद, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

UNITED NEWS OF ASIA. मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित करीब 650 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक अदीना मस्जिद को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। मस्जिद परिसर के बाहर शिवलिंग स्थापित करने की घोषणा के बाद क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

जानकारी के अनुसार, आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर नामक एक संगठन ने सावन के दूसरे सोमवार को मस्जिद परिसर के बाहर शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना करने की घोषणा की है। संगठन का दावा है कि 1.5 टन वजनी शिवलिंग पश्चिम बंगाल के हुगली जिले स्थित तारकेश्वर से लाया गया है।

हिंदू संगठनों और कुछ भाजपा नेताओं का दावा है कि वर्तमान अदीना मस्जिद का निर्माण प्राचीन भगवान शिव के आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त कर किया गया था। इसी आधार पर संगठन मस्जिद के बाहर शिवलिंग स्थापना और पूजा करने की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, मुस्लिम संगठनों और स्थानीय नेताओं ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि अदीना मस्जिद एक ऐतिहासिक और संवेदनशील स्थल है तथा यहां किसी भी नए धार्मिक आयोजन या निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से यथास्थिति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के तनाव को रोकने की मांग की है।

इससे पहले भी अदीना मस्जिद चर्चा में रही थी, जब बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान द्वारा मस्जिद परिसर की सफाई के बाद साझा की गई तस्वीरों को लेकर विवाद हुआ था। अब शिवलिंग स्थापना की घोषणा के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार अदीना मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है। एएसआई के नियमों के तहत संरक्षित स्मारकों के भीतर किसी भी प्रकार की नई धार्मिक गतिविधि या निर्माण की अनुमति नहीं होती। इसी कारण प्रशासन पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ देख रहा है।

जिला प्रशासन और पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है तथा दोनों पक्षों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

फिलहाल यह मामला ऐतिहासिक दावों, धार्मिक आस्था और कानूनी प्रावधानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। वहीं, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और आगे की स्थिति प्रशासनिक निर्णयों तथा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।