पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा को संसदीय समिति की चेतावनी, मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन में मांगी माफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले में संसदीय समिति ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर सेफ हार्बर सुरक्षा पर पुनर्विचार की सिफारिश की जा सकती है।

Aug 5, 2026 - 15:47
 0  3
पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा को संसदीय समिति की चेतावनी, मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन में मांगी माफी

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले ने नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मुद्दे पर संसदीय समिति ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। समिति ने संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा पर पुनर्विचार की सिफारिश की जा सकती है।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो हटाया जाना गंभीर मामला है। समिति के अनुसार, इस घटना की जवाबदेही तय होना आवश्यक है और कंपनी के सर्वोच्च नेतृत्व को इस पर सार्वजनिक रूप से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

इससे पहले मेटा ने स्वीकार किया था कि प्रधानमंत्री का वीडियो तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से हट गया था। कंपनी के अधिकारियों ने संसदीय समिति की बैठक में इस त्रुटि के लिए खेद भी व्यक्त किया और इसे तकनीकी समस्या का परिणाम बताया। हालांकि समिति के कई सदस्यों ने इसे केवल तकनीकी गलती मानने के बजाय जवाबदेही का विषय बताया।

समिति ने यह भी कहा कि यदि मार्क जुकरबर्ग निर्धारित समय के भीतर माफी नहीं मांगते हैं तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा समाप्त करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। सेफ हार्बर सुरक्षा हटने की स्थिति में प्लेटफॉर्म और उसके अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी बढ़ सकती है तथा विभिन्न मामलों में सीधे कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

बैठक के दौरान समिति ने सोशल मीडिया कंपनियों को बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री (Child Sexual Exploitative and Abuse Material) और महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को समयबद्ध तरीके से हटाने के निर्देशों के प्रभावी पालन पर भी जोर दिया। समिति ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और अवैध सामग्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इसी बीच तेलंगाना में गूगल और मेटा के खिलाफ अलग-अलग आरोपों को लेकर एफआईआर दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें गूगल पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी वाले ऐप्स को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तथा मेटा पर प्रधानमंत्री से जुड़ी फर्जी सामग्री के प्रसार से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर मेटा की ओर से यही आधिकारिक रुख सामने आया है कि वीडियो तकनीकी कारणों से हटा था और इसके लिए कंपनी पहले ही खेद जता चुकी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या मार्क जुकरबर्ग व्यक्तिगत रूप से सार्वजनिक माफी जारी करते हैं और संसदीय समिति की मांग पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।