जानकारी के अनुसार, मात्र 18 किलोग्राम वजन वाली इस बच्ची की पहचान अस्पताल द्वारा आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर के दौरान हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद उसे विस्तृत परीक्षण के लिए अस्पताल लाया गया, जहां पता चला कि वह गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रही थी। बच्ची को पल्मोनरी स्टेनोसिस, एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) और जन्मजात कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक (CHB) जैसी तीन गंभीर बीमारियां थीं।
पल्मोनरी स्टेनोसिस के कारण हृदय से फेफड़ों तक रक्त ले जाने वाला वाल्व अत्यधिक संकरा हो गया था, जबकि ASD के कारण हृदय के ऊपरी कक्षों के बीच बड़ा छेद मौजूद था। वहीं CHB की वजह से हृदय की धड़कन असामान्य रूप से धीमी हो गई थी। इन सभी जटिल समस्याओं के कारण बच्ची की स्थिति काफी गंभीर थी और तत्काल इलाज की आवश्यकता थी।
डॉक्टरों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण मामले में चरणबद्ध तरीके से तीन महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं करने का निर्णय लिया। पहले चरण में बैलून वॉल्वुलोप्लास्टी के माध्यम से संकरे वाल्व को खोला गया, इसके बाद डिवाइस क्लोजर तकनीक से ASD को बंद किया गया और अंत में स्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया।
इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डॉ. किंजल ने किया। उन्होंने वॉल्वुलोप्लास्टी और डिवाइस क्लोजर को अत्यंत सटीकता के साथ पूरा किया। उनके अनुसार, बच्ची की कम उम्र और कम वजन के कारण यह प्रक्रिया और भी अधिक संवेदनशील थी।
इसके अगले दिन सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लिनिकल लीड कार्डियोलॉजी डॉ. सुमन्ता शेखर पाढ़ी ने पेसमेकर प्रत्यारोपण किया। इस दौरान सिंगल चैंबर कंडक्शन सिस्टम पेसिंग तकनीक का उपयोग किया गया, जो छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है।
पूरी प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया टीम, जिसमें डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. प्रशांत शामिल थे, ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी प्रक्रियाएं लोकल एनेस्थीसिया और सेडेशन के तहत सफलतापूर्वक पूरी की गईं और किसी भी प्रकार की जटिलता सामने नहीं आई।
सबसे खास बात यह रही कि बच्ची को मात्र तीन दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जो इस तरह की जटिल प्रक्रिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेल्लमकोंडा ने इस सफलता को टीमवर्क और उन्नत चिकित्सा तकनीक का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अस्पताल की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
यह मामला न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीक की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि समय पर पहचान और सही उपचार से जटिल जन्मजात हृदय रोगों को भी सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है।