बालाघाट में धार्मिक आस्था और भाईचारे के साथ मनाया गया ईदुल अजहा का पर्व

बालाघाट जिले में ईदुल अजहा का पर्व मुस्लिम समाज ने धार्मिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। ईदगाह और मस्जिदों में विशेष नमाज अदा कर देश में अमन-चैन और तरक्की की दुआ मांगी गई। कुर्बानी के बाद जरूरतमंदों में गोश्त बांटकर भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया गया।

May 28, 2026 - 12:38
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बालाघाट में धार्मिक आस्था और भाईचारे के साथ मनाया गया ईदुल अजहा का पर्व

UNITED NEWS OF ASIA. सायमा नाज l बालाघाट जिले में ईदुल अजहा का पर्व गुरुवार को मुस्लिम समाज द्वारा हर्षोल्लास, धार्मिक आस्था और भाईचारे के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही ईद का उत्साह और रौनक देखने को मिली। लोगों ने नए कपड़े पहनकर ईदगाह और मस्जिदों में पहुंचकर विशेष नमाज अदा की और देश में अमन-चैन, तरक्की तथा खुशहाली की दुआ मांगी।

जिला मुख्यालय में पुलिस लाइन स्थित ईदगाह और वार्ड क्रमांक 10 रजा नगर स्थित मस्जिदे आला हजरत (जामेआ नूरिया मदरसा) में ईद की विशेष नमाज अदा की गई। ईदगाह में मौलाना मोहम्मद समसिर हक ने नमाज अदा कराई, जबकि जामेआ नूरिया मदरसा में मौलाना आफताब ने नमाज पढ़ाई। नमाज के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।

नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। बच्चों और युवाओं में त्योहार को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया। कई परिवारों ने अपने घरों में विशेष व्यंजन तैयार किए और रिश्तेदारों तथा परिचितों के साथ खुशियां साझा कीं। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पूरे दिन त्योहार की रौनक बनी रही और लोग आपसी भाईचारे के साथ एक-दूसरे के घर पहुंचकर बधाइयां देते नजर आए।

ईदुल अजहा के अवसर पर मुस्लिम समाज के लोगों ने कुर्बानी की परंपरा निभाई। कुर्बानी के बाद उसका गोश्त गरीबों, यतीमों, जरूरतमंदों और रिश्तेदारों में बांटा गया, ताकि समाज के सभी लोग इस खुशी में शामिल हो सकें। लोगों ने कहा कि ईदुल अजहा त्याग, बलिदान और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व है, जो समाज में आपसी प्रेम और सहयोग की भावना को मजबूत करता है।

इमामों ने अपने बयान में जरूरतमंदों की मदद करने को ईद का असली संदेश बताया। उन्होंने लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और मिलजुल कर रहने की अपील की। साथ ही कहा कि सभी धर्म प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देते हैं और समाज में शांति बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

पर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ईदगाह और मस्जिदों के बाहर पुलिस जवान सुबह से देर शाम तक तैनात रहे। सुरक्षा व्यवस्था के चलते लोगों ने शांति और सौहार्द के माहौल में त्योहार मनाया।

बालाघाट में मनाए गए इस पर्व ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। लोगों ने देश में शांति, भाईचारे और तरक्की की दुआ करते हुए एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटी। पूरे जिले में ईदुल अजहा का पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।