बचेली बस स्टैंड में उपेक्षा का शिकार शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति

दंतेवाड़ा जिले के बचेली बस स्टैंड में स्थापित शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। मूर्ति के आसपास गंदगी, अंधेरा और अव्यवस्था से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। नगरपालिका और पीडब्ल्यूडी के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान चल रही है, जबकि आदिवासी समाज ने जल्द सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

May 28, 2026 - 13:18
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बचेली बस स्टैंड में उपेक्षा का शिकार शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति

UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l दंतेवाड़ा जिले के बचेली बस स्टैंड में स्थापित शहीद वीर नारायण सिंह की मूर्ति इन दिनों उपेक्षा और बदहाल व्यवस्था का शिकार बनी हुई है। 1857 की क्रांति के महानायक और आदिवासी समाज के गौरव माने जाने वाले वीर नारायण सिंह की प्रतिमा के आसपास गंदगी फैली हुई है। मूर्ति के पास शराब की खाली बोतलें पड़ी रहती हैं और रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और आदिवासी समाज में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार वर्षों पहले समाज के सहयोग से बड़े बचेली बस स्टैंड में वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी। लेकिन स्थापना के बाद से अब तक मूर्ति के लिए पक्का चबूतरा तक नहीं बनाया गया है। नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में यह स्थान बदहाल होता जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिस शहीद ने गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनकी प्रतिमा की इस तरह अनदेखी होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

इतिहास में वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1856 के भीषण अकाल के दौरान उन्होंने भूख से परेशान गरीबों और आदिवासियों के लिए अंग्रेजों के अनाज गोदाम से अनाज निकालकर लोगों में बांटा था। इसके बाद 1857 की क्रांति में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार कर 10 दिसंबर 1857 को रायपुर में फांसी दे दी थी। उनका बलिदान आज भी आदिवासी समाज और प्रदेश के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।

मूर्ति की दुर्दशा को लेकर नगरपालिका और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान जारी है। नगरपालिका का कहना है कि बस स्टैंड क्षेत्र पीडब्ल्यूडी के अधीन आता है, इसलिए वहां की व्यवस्था और रखरखाव की जिम्मेदारी उसी विभाग की है। वहीं पीडब्ल्यूडी का तर्क है कि प्रतिमा और उसके आसपास की सफाई तथा देखरेख नगरपालिका को करनी चाहिए। विभागों के इस आपसी विवाद के चलते वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है।

इस स्थिति को लेकर स्थानीय युवाओं और आदिवासी समाज ने नाराजगी जाहिर की है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा नहीं बल्कि शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान और सम्मान का प्रतीक है। समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर प्रतिमा स्थल की सफाई, लाइटिंग और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा।

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगों में प्रतिमा के लिए पक्का चबूतरा निर्माण, परिसर का सौंदर्यीकरण, नियमित सफाई व्यवस्था, पर्याप्त लाइटिंग, सुरक्षा व्यवस्था और हर वर्ष शहीद दिवस पर राजकीय सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहीद की स्मृति से जुड़े इस स्थान को सम्मानजनक स्वरूप दिया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।