बिरसा में आंगनबाड़ी सहायिका की पदोन्नति पर विवाद, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

महिला एवं बाल विकास परियोजना बिरसा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नति को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना एक सहायिका को पदोन्नत किया गया। वहीं परियोजना प्रभारी शिप्रा सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए पदोन्नति को विभागीय नियमों के अनुरूप बताया है।

Jul 21, 2026 - 11:39
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बिरसा में आंगनबाड़ी सहायिका की पदोन्नति पर विवाद, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. सायमा नाज, बालाघाट l महिला एवं बाल विकास परियोजना बिरसा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर की गई पदोन्नति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भीमजोरी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 815 में पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्थानीय महिलाओं ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं परियोजना प्रभारी शिप्रा सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया विभागीय नियमों के तहत संपन्न की गई है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार भीमजोरी आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 815 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का पद रिक्त होने के बाद नई पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की गई। उनका आरोप है कि विभागीय नियमों के अनुसार संबंधित वार्ड की सभी पात्र आंगनबाड़ी सहायिकाओं से आवेदन आमंत्रित किए जाने चाहिए थे। इसके लिए सूचना-पटल पर सूचना प्रकाशित करना, पात्र सहायिकाओं को आवेदन करने की जानकारी देना तथा आवश्यक दस्तावेज जमा करने का अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पदोन्नति की प्रक्रिया कथित रूप से गोपनीय तरीके से पूरी की गई और बिना सभी पात्र सहायिकाओं को अवसर दिए एक सहायिका को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। शिकायत में कथित लेन-देन का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस पदोन्नति से नाराज स्थानीय महिलाओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विभागीय नियमों का पालन नहीं किया गया है तो संबंधित पदोन्नति को निरस्त कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा चयन किया जाना चाहिए। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने से सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सकेगा।

दूसरी ओर महिला एवं बाल विकास परियोजना बिरसा की प्रभारी शिप्रा सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि संबंधित पदोन्नति पूरी तरह विभागीय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई है। उनके अनुसार किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात नहीं हुआ है और सभी प्रशासनिक कार्रवाई नियमानुसार संपन्न की गई है।

शिप्रा सिंह का कहना है कि विभाग पारदर्शिता के साथ कार्य करता है और लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि मामले की जांच होती है तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और विभागीय प्रक्रिया सही पाए जाने की पुष्टि होगी।

फिलहाल शिकायत के बाद यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। अब सभी की नजर संभावित जांच पर टिकी है। यदि प्रशासन जांच के आदेश देता है तो संबंधित दस्तावेजों, चयन प्रक्रिया और विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पदोन्नति विभागीय नियमों के अनुरूप हुई थी या शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य है।

स्थानीय महिलाओं का कहना है कि सरकारी योजनाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि सभी पात्र हितग्राहियों और कर्मचारियों का विश्वास बना रहे। वहीं विभाग का कहना है कि उसने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।