गनियारी पहुंचा तीजन बाई का पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का पार्थिव शरीर रायपुर एम्स से उनके पैतृक गांव गनियारी पहुंच गया है। गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिष्य, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच रहे हैं।

Jul 5, 2026 - 13:10
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गनियारी पहुंचा तीजन बाई का पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

UNITED NEWS OF ASIA. पद्म विभूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में शोक का माहौल है। रविवार को उनका पार्थिव शरीर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर से दुर्ग जिले के उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पार्थिव शरीर को गनियारी स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां परिजनों, ग्रामीणों, शिष्यों, लोक कलाकारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लगभग सुबह 11:30 बजे पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए मुक्ति धाम ले जाया जाना है, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अंतिम संस्कार की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। दुर्ग कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी गनियारी में मौजूद हैं और सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। गांव में शोक का माहौल है तथा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग अपने प्रिय लोक कलाकार को अंतिम विदाई देने पहुंच रहे हैं।

तीजन बाई का रविवार सुबह रायपुर एम्स में निधन हुआ। वे पिछले लगभग 38 दिनों से उपचाराधीन थीं। 72 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला, साहित्य और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा पंडवानी को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली तीजन बाई का जाना भारतीय लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ रायपुर एम्स पहुंचकर तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया है।

तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और विशिष्ट प्रस्तुति शैली से पंडवानी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को लोक शैली में प्रस्तुत कर भारतीय लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।

आज गनियारी में हजारों लोगों की मौजूदगी में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके निधन से केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक और लोककला जगत ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी है। उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।