बस्तर में आदिवासियों की रिहाई को लेकर कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान, सुकमा के तिम्मापुरम से हुई शुरुआत

सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा ने जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर तिम्मापुरम से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। अभियान में ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने अभियान को गांव-गांव तक ले जाने और मुद्दे को सरकार तक पहुंचाने की बात कही है।

Sep 9, 2026 - 18:37
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बस्तर में आदिवासियों की रिहाई को लेकर कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान, सुकमा के तिम्मापुरम से हुई शुरुआत

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेन्ट गिरी, सुकमा l जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अभियान शुरू किया है। सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा ने तिम्मापुरम से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य जेलों में बंद बताए जा रहे निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा और उनकी रिहाई की मांग को सरकार तक पहुंचाना है। अभियान के दौरान ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर हस्ताक्षर किए। कांग्रेस ने इस अभियान को आगे गांव-गांव तक पहुंचाने की बात कही है।

हरीश कवासी लखमा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय तक चली लड़ाई के दौरान कई आदिवासी जेलों में बंद हुए। कांग्रेस का कहना है कि इनमें जो लोग निर्दोष हैं, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए और यदि वे दोषमुक्त पाए जाते हैं तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए। पार्टी ने इस मुद्दे को आदिवासी परिवारों से जुड़ा बताते हुए कहा कि कई परिवार लंबे समय से अपने परिजनों की घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

तिम्मापुरम में अभियान की शुरुआत के दौरान ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों ने हस्ताक्षर कर अपनी मांग के प्रति समर्थन जताया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से उन परिवारों की आवाज को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है, जो अपने परिजनों के जेल में होने के कारण लंबे समय से परेशान हैं। पार्टी का कहना है कि अभियान केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बस्तर के अलग-अलग गांवों तक ले जाया जाएगा।

हरीश कवासी लखमा ने कहा कि यदि बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्र की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है, तो जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की भी गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, उनकी कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष जांच और सुनवाई जरूरी है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और जिन लोगों के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते हैं, उन्हें नियमानुसार राहत दी जाए।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि हस्ताक्षर अभियान के जरिए ग्रामीणों की मांग और प्रभावित परिवारों की आवाज को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि इस मुद्दे पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो इसे व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान गांव से शुरू होकर जरूरत पड़ने पर सड़क और सदन तक पहुंचेगा।

हस्ताक्षर अभियान शुरू होने से प्रभावित परिवारों में अपने परिजनों की रिहाई और मामलों की समीक्षा को लेकर उम्मीद जगी है। अभियान में शामिल ग्रामीणों ने भी अपनी बात रखते हुए सरकार से जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि अभियान के दौरान एकत्र किए जाने वाले हस्ताक्षरों को आगे प्रशासन और सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

फिलहाल तिम्मापुरम से शुरू हुआ यह अभियान बस्तर में आदिवासियों की रिहाई और उनके मामलों की समीक्षा के मुद्दे को लेकर कांग्रेस की नई पहल के रूप में सामने आया है। आने वाले दिनों में अभियान को अन्य गांवों तक पहुंचाने की तैयारी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। वहीं प्रभावित परिवारों की नजर अब प्रशासन और सरकार की ओर से इस संबंध में उठाए जाने वाले कदमों पर बनी हुई है।